Jabalpur news:बिना रजिस्ट्रेशन-लाइसेंस दौड़ रहे ई-रिक्शा पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

High Court takes a tough stand on e-rickshaws plying without registration and licence, seeks response from the government

जबलपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में यातायात की गंभीर समस्या बन चुके ई-रिक्शा का मामला अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। बिना रजिस्ट्रेशन, परमिट और ड्राइविंग लाइसेंस सड़कों पर दौड़ रहे ई-रिक्शा को लेकर केंद्र सरकार के उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई है, जिसमें ई-रिक्शा को सामान्य मोटर वाहनों की तरह इन अनिवार्यताओं से छूट दी गई है। इस पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच ने मध्य प्रदेश सरकार, परिवहन विभाग, जबलपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने माना कि मामला जनहित और यातायात सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न उठाता है।याचिकाकर्ता समाजसेवी पी. जी. नाजपांडे की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि नियमों में दी गई छूट का दुरुपयोग हो रहा है और 12 से 15 वर्ष तक के नाबालिग भी ई-रिक्शा चला रहे हैं, जिस पर कार्रवाई का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं बचता। वहीं केंद्र सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66(3)(N) के तहत नियमों के अनुसार ही यह छूट दी गई है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने ई-रिक्शा निर्माता कंपनी की एक अन्य याचिका को भी इस मामले के साथ क्लब कर दिया और सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 16 जनवरी तय की है। अब इसी सुनवाई में यह तय होगा कि ई-रिक्शा को दोबारा ट्रांसपोर्ट एक्ट के दायरे में लाया जाएगा या नहीं।

जबलपुर से वाजिद खान की रिपोर्ट

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