Azamgarh news:बरदह गांव की ‘बीरबल पोखरी पर कब्जा,कचरे से पटी जलस्रोत बनी बीमारी का खतरा
Occupation of Birbal Pokhari of Bardah village, water source filled with garbage, danger of disease

विवेक तिवारी
बरदह /आजमगढ:बरदह गांव में स्थित राजस्व अभिलेखों में दर्ज ‘बि र बल’ नामक पोखरी जिसका गाटा संख्या 997 पूरी तरह कचरे और मिट्टी से पट चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार, कई बार शासन-प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि वर्तमान में पोखरी की प्राकृतिक स्थिति मूल स्वरूप (नवईयत) तक बदलती नजर आ रही है।ग्रामीणों का आरोप है कि पोखरी के एक बड़े हिस्से पर दबंगों द्वारा कब्जा कर लिया गया है। जब इस संबंध में ग्राम प्रधान से शिकायत की गई तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि “कब्जा हो जाए, चाहे जो हो, हमें इससे कोई मतलब नहीं है।” यह बयान प्रशासनिक उदासीनता और जनसमस्याओं के प्रति लापरवाही को दर्शाता है।पोखरी के बगल से एक मुख्य रास्ता गुजरता है, जिससे रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीणों का आवागमन होता है। इसी रास्ते से स्कूली बच्चे भी आते-जाते हैं। पोखरी और रास्ता आपस में सटा हुआ है तथा पोखरी में भरे कचरे और मिट्टी के कारण गंदगी फैल रही है। कई स्थानों पर पोखरी का किनारा फट चुका है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।ग्रामीणों ने बताया कि शिकायत के बाद जेसीबी से खुदाई तो कराई गई, लेकिन वह भी आधी-अधूरी रही। आधी पोखरी की खुदाई हुई और आधा हिस्सा दबंगों के कब्जे में छोड़ दिया गया, जहां लगातार कचरा और मिट्टी डाली जा रही है। इससे जलस्रोत के पूरी तरह समाप्त होने की आशंका गहराती जा रही है।इस गंभीर समस्या को लेकर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को भी अवगत कराया गया, लेकिन वहां से भी अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों में प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर भारी रोष है।ग्रामीणों ने मांग की है कि आबादी के बीच स्थित पोखरी से अवैध कब्जा तत्काल हटाया जाए, पूरी खुदाई कराई जाए, कचरा हटाकर जलस्रोत को पुनर्जीवित किया जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो और आमजन व स्कूली बच्चों को बीमारी के खतरे से बचाया जा सके।



