Azamgarh news:सेवा, संस्कार और समाज-समर्पण की मिसाल बने राजा साहब डॉ. संतोष कुमार मिश्रा
Raja Saheb Dr. Santosh Kumar Mishra became an example of service, culture and social dedication.

आजमगढ़ जिले के ठेकमा ब्लॉक स्थित बालपुर खरैला में एम.एस.डी. पॉलिटेक्निक कैंपस एक बार फिर मानवता, करुणा और सामाजिक सरोकारों का साक्षी बना। एम.एस.डी. ग्रुप ऑफ कॉलेज के चेयरमैन राजा साहब डॉ. संतोष कुमार मिश्रा ने अपनी पूज्य माता राजमाता सुमित्रा देवी की द्वितीय पुण्यतिथि के अवसर पर जो कार्य किया, वह न केवल एक पुत्र का कर्तव्य था, बल्कि समाज के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता और नेतृत्व क्षमता का भी प्रमाण बना।राजा साहब के मार्गदर्शन में 556 गरीब महिला एवं पुरुषों को कंबल वितरण किया गया,वहीं आयोजित रक्तदान शिविर में दर्जनों लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर मानव जीवन की रक्षा का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत राजा साहब द्वारा राजमाता सुमित्रा देवी एवं महाराज पंडित त्रिपुरारी मिश्रा की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलन के साथ हुई। पूरा परिसर “राजमाता सुमित्रा देवी अमर रहें” और “महाराज पंडित त्रिपुरारी मिश्रा अमर रहें” के नारों से गूंज उठा।हजारों की संख्या में उपस्थित ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों के बीच राजा साहब ने जिस सादगी और आत्मीयता से अपने माता-पिता के संस्कारों को याद किया,उसने सभी को भावुक कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी माता निष्पक्ष, निडर और साहसी थीं, जो हर परिस्थिति में समान दृष्टि रखती थीं। उन्हीं मूल्यों को उन्होंने अपने जीवन में आत्मसात किया और शिक्षा व समाज सेवा को अपना ध्येय बनाया।राजा साहब ने बताया कि माता के नाम पर एम.एस.डी. पॉलिटेक्निक कॉलेज, एम.एस.डी. आदर्श होम्योपैथी कॉलेज, मां विंध्यवासिनी सुमित्रा देवी एजुकेशनल ट्रस्ट तथा पिता के नाम पर पं. त्रिपुरारी मिश्रा महाविद्यालय और पंडित त्रिपुरारी मिश्रा फार्मेसी कॉलेज की स्थापना कर उन्होंने शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प पूरा किया। उनके पिता द्वारा 40 वर्ष पूर्व स्थापित जूनियर हाई स्कूल और बाबा रामनाथ जी की विद्वत्ता व सरकारी सेवा की परंपरा आज भी उनके कार्यों में जीवंत दिखाई देती है।कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने राजा साहब को संस्कारवान, दूरदर्शी, कर्मठ और समाजहितैषी नेतृत्व का प्रतीक बताया। संचालन अवधेश शर्मा एडवोकेट ने किया, जबकि अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने उनके सामाजिक योगदान की मुक्तकंठ से सराहना की।अंत में राजा साहब ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए समाज से अपील की कि माता-पिता का सम्मान और सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। कंबल एवं मिष्ठान वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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