Jabalpur news:मनरेगा की वैधानिक गारंटी पर खतरा: कांग्रेस ने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का ऐलान

Jabalpur news:मनरेगा के अधिकार आधारित स्वरूप को खत्म करने का आरोप, 11 जनवरी को उपवास

कांग्रेस मांग

जबलपुर:महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), जिसे वर्ष 2005 में UPA सरकार द्वारा लागू किया गया था, यह एक अधिकार आधारित कानून है, जो प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मजदूरी व रोजगार की मांग करने का वैधानिक अधिकार देता है, कानून की तहत राज्य सरकार 15 दिनों के भौतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है. अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देय होता है यही वैधानिक गारंटी कही जाती है मनरेगा ग्रामीण आजीविका सुरक्षा की रीढ़ रहा है, यह प्रतिवर्ष 5 से 6 करोड़ परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराता है मजबूरी में होने वाला पलायन को कम करता है ग्रामीण मजदूरी बढ़ाता है और टिकाऊ सामुदायिक परिस्थितियों का निर्माण करता है इसकी मांग आधारित संरचना सुरक्षित मजदूरी और सीधे बैंक भुगतान की व्यवस्था से विशेष रूप से महिलाओं दलितो आदिवासियों और वंचित समुदायों को लाभ हुआ है, जिसमें महिलाओं की हिस्सेदारी कुल कार्य दिवसी का लगभग 60% है।नया VB-Gram-G अधिनियम पुरे ढाँचे से एक मौलिक विचलन है यह काम की वैधानिक गारंटी को समाप्त करता है, निर्णय प्रक्रिया का केन्द्रीकरण केंद्र सरकार के हाथों में करता है, ग्राम सभाओं और पंचायतो को कमजोर करता है तथा केंद्र के मजदूरी अंशदाने को लगभग 90% से घटाकर 60% कर देता है, जिससे वित्तीय बोझ राज्यों और श्रमिको पर डाल दिया जाता है जिसको लेकर ग्रामीण आजीविकाओं पर गंभीर हमले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस कार्य समिति 27 दिसम्बर 2025 को हुई अपनी बैठक में सर्व सम्मति से मनरेगा बचाओं संग्राम नामक एक राष्ट्रव्यापी जन आन्दोलन शुरू करने का निर्णय लिया है, ताकि काम के आधिकार की रक्षा की जा सके और मनरेगा को उसके मूल अधिकार अधारित स्वरुप में बहाल किया जा सके ज़बलपुर में 11 जनवरी 2026 को जिला मुख्यालय/ब्लॉक मुख्यालय या सार्वजानिक स्थलौ पर महात्मा गाँधी व डॉ बी आर आंबेडकर की प्रतिमा के पास पार्टी नेताओं व निर्वाचित नेताओं व प्रतिनिधियों और मनरेगा श्रमिको की भागीधारिता के साथ एक दिवसीय उपवास रखा जायेगा

 

जबलपुर से वाजिद खान की रिपोर्ट

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