Deoria news, योजना का उद्देश्य दुर्घटना में बिना पैसे के मरीज का इलाज सुनिश्चित कराना

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योजना का उद्देश्य दुर्घटना में बिना पैसे के मरीज का इलाज सुनिश्चित कराना
देवरिया।
भारत सरकार ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य दुर्घटना के बाद के सबसे कीमती समय (Golden Hour) में बिना पैसे की चिंता किए मरीज का इलाज सुनिश्चित करना है। इस योजना का नाम कैशलेस ट्रीटमेंट ऑफ रोड एक्सीडेंट विक्टिम है।
शुक्रवार को पुलिस लाइन देवरिया के सभागार में जनपद के समस्त थानों के उप निरीक्षक गण को इस योजना से संबंधित जानकारी और प्रशिक्षण, जिला कलेक्ट्रेट, एन आई सी कार्यालय के जिला रोल आउट मैनेजर सौरभ गुप्ता द्वारा जिला सूचना विज्ञान अधिकारी कृष्णानंद यादव के मार्ग दर्शन में दिया गया। अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) श्री सुनील कुमार सिंह के निर्देश एवं यातायात कार्यालय से टीएसआई गुलाब सिंह के सहयोग से इस प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।
इसमे बताया गया कि जब कोई सड़क दुर्घटना पीड़ित अस्पताल पहुँचता है तो उसको तुरंत भर्ती करने के साथ ही टी एम एस पोर्टल पर उसकी पेशेंट आई डी अस्पताल द्वारा बनाई जाती है जिसकी रिक्वेस्ट दुर्घटना से संबंधित थाना प्रभारी केई डार आईडी (पूर्व में आई रेड) मे जाती है। फिर संबंधित पुलिस अधिकारी द्वारा दुर्घटना की जाँच कर 24 घंटे के अंदर एक्सीडेंट आई डी (विक्टिम आई डी) जेनेरेट कर अस्पताल को अप्रूवल दी जाती है, पेशेंट आई डी से मैपिंग के लिए। जिसके बाद केस स्कीम मे ऐड हो जाता है। अत्यंत गंभीर केसेस के लिए पुलिस को वेरिफिकेशन के लिए 48 घंटे का समय दिया जाता है।
साथ ही साथ ई डार पोर्टल पर सड़क दुर्घटना की फीडिंग से संबंधित जानकारी, वाहन के तकनीकी मुआयना की रिक्वेस्ट ARTO को ई डार पोर्टल से एवं दुर्घटना से संबंधित सड़क के जाँच की रिक्वेस्ट पी डब्लू डी इंजीनियर को पोर्टल से ही भेजने की जानकारी दी गई।
​सड़क दुर्घटना के बाद पहले 60 मिनट (Golden Hour) सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। अक्सर लोग अस्पताल में पैसे जमा करने की चिंता में इलाज में देरी कर देते हैं। यह योजना यह सुनिश्चित करती है कि पीड़ित को तुरंत मुफ्त इलाज मिले, चाहे उसके पास पैसे हों या नहीं।
​प्रत्येक व्यक्ति को प्रति दुर्घटना अधिकतम ₹1.5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलता है।
​दुर्घटना के समय से अधिकतम 7 दिनों तक का इलाज कवर किया जाता है।
​यह योजना भारत के सभी नागरिकों और विदेशी नागरिकों के लिए भी उपलब्ध है जो भारतीय सड़कों पर दुर्घटना का शिकार होते हैं।
इसमें सभी सरकारी और योजना से जुड़े (Empaneled) प्राइवेट अस्पताल शामिल हैं।
दुर्घटना होने पर एम्बुलेंस या पुलिस को सूचना दी जाती है। पीड़ित को नजदीकी ‘ट्रॉमा सेंटर’ या अस्पताल ले जाया जाता है तथा अस्पताल को पीड़ित से पैसे मांगने की अनुमति नहीं होती। अस्पताल इसका क्लेम सीधे सरकार (NHAI या स्वास्थ्य मंत्रालय) से करता है। यह योजना ‘आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ के ढांचे के साथ मिलकर काम करती है, जिससे दावों का निपटान आसान हो जाता है।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए पीड़ित के पास पहले से कोई बीमा पॉलिसी होना अनिवार्य नहीं है। सरकार का लक्ष्य सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्या को कम करना है।

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