Azamgarh news :फर्जी लोन दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी करने वाला अपराधी गिरफ्तार

फर्जी लोन दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी करने वाला अपराधी गिरफ्तार

आजमगढ़ ब्यूरो चीफ राकेश श्रीवास्तव
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जनपद आज़मगढ़ डॉ0 अनिल कुमार, के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक यातायात श्री विवेक त्रिपाठी के कुशल पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम श्रीमती आस्था जायसवाल के मार्गदर्शन में थाना साइबर
दिनांक 11.04.2025 को शिकायतकर्ता प्रतीक पुंडकर, निवासी – गाडगे नगर, अमरावती (महाराष्ट्र) द्वारा NCRP पोर्टल पर शिकायत संख्या 31904250060313 दर्ज कराई गई थी। उक्त शिकायत के आधार पर प्राप्त संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच के क्रम में थाना साइबर क्राइम पर मु0अ0सं0- 03/2026, धारा 318(4), 319(2), 336, 340 बीएनएस एवं 66 डी आईटी एक्ट, पंजीकृत किया गया।
विवेचना के दौरान निरीक्षक विभा पाण्डेय द्वारा साइबर थाना टीम के साथ तकनीकी विश्लेषण एवं मोबाइल लोकेशन के आधार पर प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, रोजगार योजना एवं अन्य विभिन्न प्रकार के लोन दिलाने के नाम पर स्वयं को फर्जी फाइनेंस डिपार्टमेंट का लोन अधिकारी बताकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले शातिर अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया है। अभियुक्त के कब्जे से 04 मोबाइल फोन, 05 गैर-राज्य (पंजाब) की फर्जी सिम कार्ड तथा लोन से संबंधित फर्जी कागजात बरामद किए गए हैं।
अभियुक्त द्वारा विभिन्न समाचार पत्रों में मुद्रा फाइनेंस, मुद्रा रोजगार योजना लोन, पर्सनल लोन, मार्कशीट लोन, बिजनेस लोन, प्रॉपर्टी लोन, महिलाओं के लिए ऑफर ग्रुप लोन तथा लघु उद्योग लोन के नाम से लुभावने विज्ञापन प्रकाशित कराए जाते थे, जिनमें प्रत्येक बार अलग-अलग फर्जी मोबाइल नंबर अंकित किए जाते थे। विज्ञापन देखकर लोन लेने के इच्छुक व्यक्तियों से संपर्क होने पर अभियुक्त द्वारा प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज एवं ऑफिस खर्च के नाम पर धनराशि अपने द्वारा संचालित फर्जी (म्यूल) खातों में मंगवाई जाती थी, जिसे वह अलग-अलग स्थानों पर स्थित जन सेवा केंद्रों से निकाल लेता था।
लोगों का विश्वास जीतने के लिए अभियुक्त द्वारा फर्जी ई-मेल आईडी
financedepartment786@gmail.com एवं futurefinance@gmail.com बनाई गई थीं, जिनके माध्यम से टारगेट व्यक्तियों को टेक्स्ट मैसेज एवं ई-मेल द्वारा “थैंक यू” संदेश भेजे जाते थे। एक बार जो व्यक्ति इसके जाल में फंस जाता था, उससे विभिन्न चरणों में कार्यवाही के नाम पर लगातार धनराशि ऐंठी जाती थी।
विभिन्न समाचार पत्रों में लोन से संबंधित फर्जी विज्ञापन प्रकाशित कराना।
फर्जी ई-मेल आईडी एवं गैर-राज्य की सिम कार्ड का प्रयोग करना।
अलग-अलग फर्जी मोबाइल नंबरों से स्वयं को विभिन्न अधिकारी बताकर बातचीत करना।
प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज व ऑफिस खर्च के नाम पर फर्जी (म्यूल) खातों में धनराशि मंगवाना एवं जन सेवा केंद्रों से नकद निकासी करना।

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