Azamgarh news:स्वयं सहायता समूहों की मेहनत से ठेकमा के ताजपुर क्षेत्र बना मशरूम उत्पादन का नया हब
Azamgarh news:The Tajpur area of Thekma has become a new hub of mushroom production due to the hard work of self-help groups.

ठेकमा/आजमगढ़:विकास खण्ड ठेकमा के ताजपुर ग्राम में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा आजीविका सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल सामने उभर कर आई है। बेली स्वयं सहायता समूह की सावित्री दीदी एवं सोनी दीदी, तथा संगम स्वयं सहायता समूह की प्रेमशिला देवी वहीं ख़ैरला के लक्ष्मी समूह के कुसुम ने समूह से प्राप्त CIF और CCL ऋण के माध्यम से मशरूम की खेती शुरू कर न केवल आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार का नया द्वार खोला है।इन दीदियों द्वारा लगाए गए प्रति मशरूम छप्पर से 80 kg से 100 kg मशरूम का उत्पादन होता है वहीं कुल 12 छप्पर से 960 kg से 1200 kg प्रतिदिन मशरूम का उत्पादन किया जा रहा है जो स्थानीय बाजार में 200 रुपए बिक्री होती है। इसमें एक छप्पर से प्रतिदिन 16000 से 20000 रुपए का आय होता है। जिसमें उन्हें अच्छा मुनाफा प्राप्त हो रहा है। इस पहल का प्रभाव केवल ताजपुर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गडहा, बालपुर खरौला, सरायपालटू सहित आसपास के क्षेत्रों के 10 से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं इस कार्य से जुड़ चुकी हैं।मशरूम उत्पादन को संगठित और बाजार से जोड़ने के उद्देश्य से रोहुआ मुस्तफाबाद में मशरूम कलेक्शन सेंटर की स्थापना की गई है। यहां से उत्पादित मशरूम वाराणसी एवं जौनपुर की मंडियों में बिक्री हेतु 200 रुपए प्रति किलो भेजा जाता है। इससे महिलाओं को उचित मूल्य मिल रहा है और विपणन की समस्या भी काफी हद तक दूर हुई है।पिछले कुछ वर्षों में यह इलाका मशरूम उत्पादन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में सशक्त हुआ है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं बीते पांच वर्षों से इस मौसमी ऑफ फॉर्मिंग कृषि उद्योग में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं और निरंतर अपनी आमदनी में वृद्धि कर रही हैं।ब्लॉक मिशन प्रबंधक डॉ. अभिषेक कुमार ने बताया कि यह पहल न केवल ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि क्षेत्र में स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रही है।



