जबलपुर में बसंत पंचमी पर सूफी परंपरा और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश
जबलपुर में बसंत पंचमी पर लंगर और दुआ के साथ गंगा-जमुनी तहज़ीब का जश्न

जबलपुर। बसंत पंचमी के अवसर पर शहर में सूफी परंपरा और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश देते हुए हज़रत अमीर ख़ुसरो और हज़रत ख़्वाजा निज़ामुद्दीन महबूब-ए-इलाही की याद में आयोजन किया गया। हिंदुस्तान की खानकाह-ए-चिश्त की परंपरा के अनुसार सूजी मोहल्ला स्थित आस्ताना-ए-आलिया में खानकाह ‘अल्बदुल जमाल’ से दरबार-ए-बुनियादी तक जुलूस निकाला गया, जहाँ चादरपोशी और गुलपोशी की रस्म अदा की गई। इस अवसर पर बसंत पंचमी और 26 जनवरी की शुभकामनाएँ देते हुए बताया गया कि अमीर ख़ुसरो द्वारा करीब साढ़े सात सौ वर्ष पहले शुरू की गई बसंत की परंपरा आज भी देशभर की खानकाहों में मनाई जा रही है। कार्यक्रम के अंत में लंगर वितरण और दुआ-ए-खैर हुई, वहीं जुलूस में हर धर्म, हर वर्ग और हर जाति के लोगों की सहभागिता ने अमन, शांति, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब का संदेश दिया, जिसे खादिम बाबा जमाली, दरबार-ए-बुनियादी की ओर से समाज तक पहुँचाया गया।
जबलपुर से वाजिद खान की रिपोर्ट



