Deoria news, कृष्ण सुदामा मित्रता की कथा सुन श्रोता हुए भाउक
कृष्ण सुदामा मित्रता की कथा सुन श्रोता हुए भावुक।
देवरिया।
बरहज नगर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस पर डॉ श्री प्रकाश मिश्रा ने श्रद्धालुओं को श्री कृष्ण एवं सुदामा की मित्रता की कथा का रसपान कराते हुए कहा कि , मित्र वही मित्र है जो मित्र के सुख-दुख सभी में सहायक हो उन्होंने कहा कि बचपन में संदीपनी ऋषि के आश्रम में कृष्ण सुदामा एक साथ शिक्षा ग्रहण की और दोनों बचपन से मित्र थे सुदामा ने अपने मित्र को श्रापित चना खाने से बचा लिया जिससे आगे चलकर सुदामा गरीब हो गए, गरीब होते हुए भी विप्र सुदामा ने कभी अपने मित्र से कुछ नहीं कहा कथा को आगे बढ़ते हुए कहा कि सुदामा के घर में कई कई एकादशी व्रत की तरह से उपवास हो जाया करता था एक दिन स्वयं भगवान सुदामा के घर पहुंचे और उन्होंने उनकी धर्मपत्नी सुशीला से पूछा की सुदामा जी कहां है साथ है यह भी बता दिया कि इतनी गरीबी में जी रहे हैं उनके एक मित्र है द्वारकाधीश श्री कृष्णा सुदामा जी को अपने मित्र से मिलकर अपनी बात कहनी चाहिए लेकिन सुदामा जी इतने संकोचि थे
कि उन्होंने कभी नहीं यह बात अपने मित्र को बताई सुशीला के बहुत कहने सुनने पर किसी तरह सुदामा जी द्वारिका गए कृष्ण से मिलन के बाद कर मुट्ठी चावल जो सुदामा की पत्नी ने चार घरों से मांग कर दिया था उसको भगवान कृष्ण ने बड़े प्रेम से ग्रहण किया दो मुट्ठी ग्रहण करने पर सुदामा जी को दो लोक दे दिया, अभी वह तीसरी मुट्ठी खाने का प्रयास ही कर रहे थे कि रुक्मणी ने भगवान कृष्ण का हाथ पकड़ लिया और कहा कि प्रभु जब तीनों लोगों को आप दान दे देंगे तो हम लोग कहां रहेंगे यह सुन भगवान कृष्ण की आंखों में आंसू आ गए उन्होंने कहा रुक्मणी इस बात की चिंता क्यों करती हो एक नए लोक का निर्माण कर दूंगा भगवान कृष्ण ने अपने मित्र सुदामा की गरीबी को अपनी कृपा से दूर कर दिया, कथा के दौरान मुख्य यजमान डॉ ओमप्रकाश शुक्ला,
आजनेय दासजी महराज, जयप्रकाश शुक्ला, प्रदिप शुक्ला, हिमाशु ,सुधासु, सुरेंद्र शुक्ला, राम बिहारी शुक्ला ,उमेश शुक्ला, नागेंद्र शुक्ला, राम आशीष शुक्ला, सच्चिदानंद शुक्ला, विनय मिश्रा, शकुंतला मिश्रा, उर्मिला मिश्रा, अनुपम मिश्रा, परशुराम पांडे, अजय शुक्ला, प्रदीप, संदीप मिश्रा सहित नगर के श्रद्धालु उपस्थित रहे।



