Deoria news, अनिति, पूर्वक प्राप्त धन सर्वनाश का कारण है श्री प्रकाश मिश्र

अनीति पुर्वक प्राप्त धन सर्वनाश का कारण है, श्रीप्रकाश ,
देवरिया।
बरहज:भईया बिजौली गांव मे चल रही श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ में श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराते हुए कथाव्यास डाक्टर श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि अनीति पुर्वक प्राप्त धन में कलियुग का वास होता है । कलि कलह और पाप कर्मों को देता है । राजा परिक्षित दिग्विजय के लिए जब निकले उसी समय एक काले पुरूष को गाय व बैल के जोडे को पैर से मार रहा था इसपर राजा परीक्षित ने कलियुग को मारने के लिए तैयार हो गए कलियुग डरकर राजा परीक्षित के पैरों पर गिर पडा । उसने कहा कोई स्थान दे दीजिए मै आपकी आज्ञा का पालन करूंगा राजा ने कलियुग पांच स्थान दिया जुआ मदिरालय वेश्यालय हिंसाग्रस्त और स्वर्ण धन । कलियुग ने मन में कहा चलो स्थान तो मिला कभी राजा की बुद्धी भी भ्रष्ट कर दूंगा । राजा परीक्षित दुसरेदिन एकपेटी में बंद मुकुट को निकालकर सिर पर धारण कर लिया यह मुकुटजरासंधका था भीम जरासंधको मारकर जबरदस्ती लाकर पेटी में बंद कर दिए थे अत: इसमें कलियुग का वास हो गया । राजा परिक्षित की वुद्धि भ्रस्ट हो गई वह शिकार के समय शमिक ॠषि के गले में सर्प डाल दिया। इसपर शमीक ऋषि के पुत्र श्रृंगी ऋषि ने श्राप दिया कि आज के सातवें दिन तक्षक नाग के डंसने से तेरी मृत्यु हो जायेगी । यह जानकर श्रीशुकदेव जी ने राजा को श्रीमद्भागवत के द्वारा सप्ताहांत मुक्ति दिलाई इस अवसर पर मायाशंकर सिंह राघवेन्द्र सिंह राजेंद सिंह सत्तन तिवारी संतोष कुमार दिक्षित आदि श्रोताओं ने कथा रसपान किए।

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