Azamgarh News: श्री मानस महायज्ञ एवं राम कथा में गूंजा भक्ति का स्वर, राम जन्म प्रसंग और श्रीराम शिक्षा प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर

आजमगढ़ बलरामपुर से बबलू राय
आजमगढ़ जनपद के बिलरियागंज विकासखंड अंतर्गत पटवध कौतुक प्राचीन शिव मंदिर परिसर में आयोजित नवदिवसीय श्री मानस महायज्ञ एवं राम कथा के चौथे दिन पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। कार्यक्रम में सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए, जबकि शाम की कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
सुबह के समय में आचार्य श्रीकांत पांडे, आचार्य राहुल शास्त्री एवं अरुण तिवारी सहित अन्य विद्वानों ने विधि-विधान से हवन पूजन कराया। वैदिक मंत्रों की ध्वनि से मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा और श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर सुख-समृद्धि की कामना की।
शाम को कथा वाचिका प्रियंका पांडे ने श्रीराम की शिक्षा से जुड़े प्रसंग का अत्यंत प्रेरक एवं भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुर पहुंचने पर भगवान राम के शौर्य, विनम्रता और ज्ञान की चर्चा चारों ओर होने लगी। कथा के माध्यम से उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि आचरण, विनम्रता और गुरु आज्ञा पालन का समन्वय है, जिसका सर्वोत्तम उदाहरण भगवान श्रीराम का जीवन है। उन्होंने बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार देने पर विशेष बल दिया।
इसके पश्चात कथावाचक ललित गिरी महाराज एवं शिव नारायण गिरी ने राम जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबो दिया। उन्होंने कहा कि जब त्रेतायुग में अधर्म और अत्याचार बढ़ गया, तब अयोध्या में राजा दशरथ के महल में भगवान श्रीराम का अवतार हुआ, जो धर्म, सत्य और मर्यादा की स्थापना का प्रतीक है।
जैसे ही रात्रि 12 बजे जन्मोत्सव का पावन क्षण आया, मंदिर परिसर शंखनाद, घंटा-घड़ियाल और “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया।
कथा के दौरान बीच-बीच में भजन-कीर्तन से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय बना रहा। कार्यक्रम के अंत में महाआरती संपन्न हुई तथा प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर डॉ. आर.बी. त्रिपाठी, पहलवानपुर के मनीष राय सूरज सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोगों ने ललित गिरी महाराज को माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
धार्मिक आयोजन से पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का माहौल बना



