भोजपुर में पत्रकारों का महासम्मेलन, अधिकार और सम्मान पर बनी बड़ी रणनीति

आइडियल पत्रकार संगठन का राष्ट्रीय विस्तार, अजय कुमार मिश्रा ने रखी मजबूत सोच

अजय कुमार मिश्रा बोले-पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं

पत्रकारों के हक की लड़ाई को मिली नई दिशा, आरा सम्मेलन रहा ऐतिहासिक

भोजपुर (आरा) में आयोजित आइडियल पत्रकार संगठन का सह पत्रकार सम्मेलन एवं सम्मान समारोह न सिर्फ भव्य रहा, बल्कि पत्रकारों के अधिकार, सम्मान और भविष्य को लेकर एक मजबूत दिशा भी तय कर गया।
रेड क्रॉस सोसाइटी परिसर में कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। देश के विभिन्न राज्यों और जिलों से पहुंचे संगठन के पदाधिकारियों का पारंपरिक रूप से स्वागत और सम्मान किया गया, जिससे आयोजन की गरिमा और बढ़ गई।
इस अवसर पर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय कुमार मिश्रा ने अपने संबोधन में संगठन की उपलब्धियों और उद्देश्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आइडियल पत्रकार संगठन आज देश के कोने-कोने तक अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुका है और पत्रकारों के आत्मसम्मान, सुरक्षा एवं अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन-प्रशासन के समक्ष पत्रकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लगातार उठाकर ठोस समाधान की दिशा में प्रयासरत है। उनके नेतृत्व में संगठन ने पत्रकार समाज के लिए एक मजबूत आवाज और मंच प्रदान किया है, जिससे आने वाले समय में पत्रकारों का भविष्य और अधिक सुरक्षित एवं उज्ज्वल होने की उम्मीद है।
कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों के हितों को लेकर गहन विमर्श हुआ और कई महत्वपूर्ण रणनीतियां बनाई गईं। विशेष सचिव ध्यानचंद यादव ने बताया कि संगठन जल्द ही पत्रकारों के कल्याण के लिए नई योजनाएं लागू करने जा रहा है, जिनका सीधा लाभ जमीनी स्तर तक कार्य कर रहे पत्रकारों को मिलेगा।इस गरिमामय आयोजन में केंद्रीय संयुक्त सचिव श्रीमती जमुना चव्हाण, राष्ट्रीय सचिव दिनेश तिवारी, राष्ट्रीय संयोजक लक्ष्मण सूर्यवंशी, शशांक खरे, श्रवण यदु, नितिन बिनकर, डॉ. रामजी प्रजापति, जयशंकर भास्कर, सीमा तिवारी सहित कई गणमान्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, यह सम्मेलन न केवल संगठन की मजबूती का परिचायक बना, बल्कि अजय कुमार मिश्रा के नेतृत्व में पत्रकारों के अधिकारों की लड़ाई को नई ऊर्जा और दिशा देने वाला ऐतिहासिक कदम साबित हुआ।

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