सीमांचल में ओवैसी की आंधी,चार का बदला 24 ने बिहार की राजनीति बदल दी
सीमांचल में ओवैसी की आंधी,चार का बदला 24 ने बिहार की राजनीति बदल दी

बिहार चुनाव परिणामों ने साबित कर दिया है कि असदुद्दीन ओवैसी अब सिर्फ सीमांचल ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार की राजनीति में एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभर चुके हैं। चुनाव प्रचार के दौरान ओवैसी ने साफ कहा था कि राजद ने उनके चार विधायकों को तोड़ा था और इसका जवाब वह सीमांचल की 24 सीटों पर देंगे। आज आए नतीजों ने दिखा दिया कि उनकी यह चेतावनी सिर्फ बयान नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत थी।राजद, जिसने 2020 में 75 सीटें जीती थीं, इस बार मात्र 25 सीटों पर सिमटती दिख रही है। वहीं महागठबंधन भी 35 सीटों पर अटक गया—यह स्पष्ट संकेत है कि यादव–मुस्लिम समीकरण में इस बार बड़ा बदलाव आया है, और इस बदलाव के केंद्र में ओवैसी की निर्णायक उपस्थिति है।ओवैसी ने पशुपति पारस, स्वामी प्रसाद मौर्य और चंद्रशेखर आज़ाद के साथ गठबंधन बनाकर 25 उम्मीदवार उतारे थे। इनमें से 5 उम्मीदवार किशनगंज, अररिया और पूर्णिया में विजयी रहे—ठीक वही पांच सीटें, जिन्हें AIMIM ने 2020 में जीता था। जिन चार विधायकों को राजद ने तोड़कर अपने पाले में लिया था, उनमें से तीन को टिकट तक नहीं मिला और एक उम्मीदवार तीसरे स्थान पर खिसक गया—यह जनता की स्पष्ट नाराज़गी का संकेत है।सीमांचल की 24 सीटों पर ओवैसी की अपील का असर इतना गहरा था कि कई सीटों पर उनके प्रत्याशी कभी न कभी बढ़त में दिखे। कहीं दूसरे नंबर पर रहे, कहीं मजबूत तीसरे नंबर पर—पर हर जगह AIMIM की उपस्थिति ने राजनीतिक समीकरण हिला दिए।महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री और मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम घोषित कर जातीय समीकरण साधने की कोशिश की थी। लेकिन AIMIM ने “कब तक दरी बिछाते रहेंगे” जैसे सवालों के जरिए पिछड़े और उपेक्षित समुदायों के दिलों में सीधी जगह बनाई। एनडीए दलों ने भी मुस्लिम डिप्टी सीएम न बनने का मुद्दा उठाया, लेकिन सीमांचल के मतदाता इस बार ओवैसी के साथ मज़बूती से खड़े रहे।यह चुनाव साफ दिखाता है कि असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति अब सिर्फ पहचान की नहीं, बल्कि अधिकार और सम्मान की राजनीति बन चुकी है। सीमांचल से दूर वैशाली की महुआ सीट पर भी AIMIM उम्मीदवार बच्चा राय ने 15 हजार से अधिक वोट हासिल कर चौथा स्थान पाकर पार्टी के बढ़ते जनाधार का संकेत दिया।2025 के इस चुनाव में ओवैसी और AIMIM ने लगभग 2% वोट शेयर हासिल कर यह ऐलान कर दिया है कि उनकी राजनीतिक यात्रा अब बिहार में मजबूती से पैर पसार चुकी है—और आगे यह राजनीतिक ताकत और भी व्यापक होने वाली है


