Azamgarh news :भूजल संरक्षण जन-आंदोलन बने, हर बूंद बचाने का लें संकल्प
भूजल संरक्षण जन-आंदोलन बने, हर बूंद बचाने का लें संकल्प

आजमगढ़ ब्यूरो चीफ राकेश श्रीवास्तव
प्रदेश सरकार द्वारा 16 से 22 जुलाई तक मनाए जा रहे भूजल सप्ताह के अंतर्गत जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार के मार्गदर्शन एवं मुख्य विकास अधिकारी/नोडल अधिकारी के निर्देशन में मंगलवार को महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ में “भूजल संरक्षण एवं जल प्रबंधन” विषय पर जागरूकता गोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया।
“यह सिर्फ सरकार का काम नहीं”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। यदि आज से ही जल बचाने की आदत विकसित की जाए तो भविष्य में जल संकट से काफी हद तक बचा जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने घर, मोहल्ले और गांव में वर्षा जल संचयन अपनाकर समाज के लिए मिसाल प्रस्तुत करें।
मुख्य वक्ता राजकीय पॉलिटेक्निक, आजमगढ़ के शिक्षक, जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक एवं राज्य भूजल पुरस्कार से सम्मानित इंजीनियर कुलभूषण सिंह ने बताया कि इस वर्ष भूजल सप्ताह “जल संरक्षण का करें संकल्प, इसका नहीं है कोई विकल्प” थीम पर मनाया जा रहा है। उन्होंने ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति के माध्यम से भूजल संरक्षण, जल प्रबंधन तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि भारत के पास विश्व के मात्र 4 प्रतिशत मीठे जल संसाधन हैं, जबकि यहां विश्व की 18 प्रतिशत आबादी निवास करती है। वर्षा जल का केवल 8 प्रतिशत ही भूगर्भ में रिचार्ज हो पाता है। यदि जल की मांग और उपलब्धता के बीच बढ़ता अंतर इसी प्रकार बना रहा तो वर्ष 2030 तक जल संकट गंभीर रूप ले सकता है।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग तथा अल-नीनो के प्रभाव के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस वर्ष सामान्य से कम एवं अनियमित वर्षा हुई है, जिससे भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। ऐसे में वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को सहेजना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
कृषि क्षेत्र में जल की सर्वाधिक खपत का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि एक किलोग्राम धान के उत्पादन में लगभग 2000 से 3000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। उन्होंने फसल विविधीकरण, दलहन एवं तिलहन जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने तथा ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाकर 60 से 70 प्रतिशत तक जल बचत करने की सलाह दी।
इंजीनियर कुलभूषण सिंह ने बताया कि आजमगढ़ जनपद प्राकृतिक जल संपदा से समृद्ध है। यहां घाघरा एवं तमसा सहित 13 नदियां तथा 144 ताल-तालाब हैं। उन्होंने नदियों एवं तालाबों को प्लास्टिक मुक्त रखने, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने तथा प्लास्टिक की बोतलों से ईको-ब्रिक (Eco Brick) बनाने की जानकारी भी विद्यार्थियों को दी।
उन्होंने दैनिक जीवन में जल संरक्षण के व्यावहारिक उपाय बताते हुए कहा कि एक टपकते नल से एक दिन में लगभग 5 लीटर पानी व्यर्थ हो जाता है, जबकि पानी की टंकी के ओवरफ्लो होने पर मात्र एक मिनट में लगभग 100 लीटर पानी बर्बाद हो जाता है, जिसे वाटर अलार्म लगाकर रोका जा सकता है।
उन्होंने बताया कि घरेलू आरओ (RO) मशीन में एक लीटर शुद्ध पानी तैयार करने के लिए लगभग 4 लीटर पानी अपशिष्ट (वेस्ट) के रूप में निकलता है। इसलिए इस पानी का उपयोग पौधों की सिंचाई, फर्श की सफाई तथा अन्य घरेलू कार्यों में किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि सबमर्सिबल पंप से कार धोने में 10 मिनट में लगभग 1000 लीटर पानी खर्च होता है, जबकि बाल्टी अथवा घरेलू कार वॉशर पंप से कार धोने पर लगभग 900 लीटर पानी की बचत संभव है। उन्होंने कहा कि खुले नलों को अनावश्यक न चलने दें तथा वर्षा जल संचयन अपनाकर हर घर को भूजल संरक्षण का केंद्र बनाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि मात्र 100 वर्ग फुट की छत पर रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित कर वर्षा ऋतु में लगभग एक लाख लीटर वर्षा जल भूगर्भ में रिचार्ज किया जा सकता है। साथ ही खेतों की मेड़ों पर वृक्षारोपण से वर्षा जल का भूगर्भ में समावेश बढ़ता है तथा स्थानीय तापमान नियंत्रित रखने में भी सहायता मिलती है।
उन्होंने कहा, “याद रखें, पानी हम बना नहीं सकते, केवल बचा सकते हैं।”
इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में आकर्षक जागरूकता पोस्टर प्रदर्शित किए गए। “भूजल बचाओ, जीवन संवारो” तथा “जल ही जीवन का आधार है” जैसे प्रेरक नारों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को वर्षा जल संचयन अपनाने तथा प्रत्येक बूंद के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।
अंत में मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने उपस्थित सभी को जल संरक्षण की शपथ दिलाई।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शशि प्रकाश शुक्ला ने किया। इस अवसर पर डॉ. हरेन्द्र सिंह प्रजापति, डॉ. मनीषा सिंह, डॉ. रेनू तिवारी, डॉ. प्रियंका सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



