विशेष लेख: विपदाओं को हरा राष्ट्रपति भवन मा. राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी राजभवन और मा. न्यायधीश डॉ. नामदेव चव्हाणसाहेब तक पहुँचीं शेवराबाई ज्ञानदेव भोसले का निधन; नायगाव में अश्रुपूरित आँखों से अंतिम विदाई
Special article: Defeat disasters at Rashtrapati Bhavan. Governor Bhagat Singh Koshyari Raj Bhavan and Hon. Judge Dr. Shevarabai Gyandev Bhosale reached Namdev Chavhansaheb; A final farewell with tearful eyes in Naigaon

संवाददाता पुणे जेष्ठ मेहबूब सर्जेखान
पुणे : अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों की धधकती ज्वालाओं से लोहा लेते हुए, दुखों और उपेक्षा की राख को दरकिनार कर अपने परिवार के जीवन में शिक्षा, संस्कार और स्वाभिमान का सवेरा लाने वाली एक महान माँ अंततः काल के कपोल में समा गईं। पुणे जिले की ‘आदर्श माता’, जिनका गौरव न केवल राज्य बल्कि देश के सर्वोच्च पद द्वारा किया गया शेवराबाई ज्ञानदेव भोसले ने सोमवार (दि. 13 जुलाई) को 95 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। हवेली तहसील के नायगाव की पवित्र माटी में जब पंचतत्वों में उनका पार्थिव देह विलीन हुआ, तो केवल एक हाड़-मांस का शरीर शांत नहीं हुआ, बल्कि आदिवासी पारधी समाज के अनवरत संघर्ष, स्वाभिमान और क्रांति का एक जीवंत इतिहास अनत में लीन हो गया।शेवराबाई का संपूर्ण जीवन संघर्ष की एक करुण, लेकिन उतनी ही प्रेरणादायी और गौरवशाली महागाथा रहा। हाथापाई और अत्यधिक गरीबी के दौर में, जहाँ एक-एक निवाले के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता था, उन्होंने न केवल अपने बच्चों को ममता की छाया में सुरक्षित रखा, बल्कि उनके भीतर ईमानदारी, शिक्षा और समाजसेवा के वे खंबीर संस्कार रोपे, जिन्होंने आगे चलकर इतिहास की धारा ही बदल दी। यदि माँ का दूध बच्चों के रक्त में शौर्य, नीति और संस्कार बनकर बहने लगे, तो समाज का परिदृश्य कैसे बदलता है—शेवराबाई का जीवन इसका सबसे जीवंत और प्रत्यक्ष प्रमाण था।मां के इन्हीं दिव्य संस्कारों और प्रेरणा की शिदोरी के बल पर उनके सपूतों ने समाज में अभूतपूर्व परिवर्तन की क्रांति ला दी। समाजसेवक नामदेव भोसले ने पारधी समाज के माथे पर लगे ‘अपराध’ के सदियों पुराने अन्यायपूर्ण और कलंकित ठप्पे को मिटाने का ऐतिहासिक कार्य किया। उन्होंने समाज के भटके हुए लोगों को शिक्षा, सम्मान और स्वाभिमान की मुख्यधारा से जोड़ा। साहित्यिक क्षेत्र में भास्कर भोसले ने अपनी ओजस्वी लेखनी के माध्यम से साहित्य जगत की अनमोल सेवा की। वहीं पत्रकार सुनील भोसले ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सजग प्रहरी बनकर शोषितों, वंचितां और पीड़ितों के आंसुओं को आवाज दी तथा उन्हें न्याय दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। पूर्व सरपंच रघुनाथ आण्णा चौधरी ने अश्रुपूरित आंखों से शेवराबाई के इस अलौकिक मातृत्व और उनके त्याग को याद करते हुए भावुक श्रद्धांजलि अर्पित की।शेवराबाई ने अपने विचारों और आचरण से समाज की प्रत्येक महिला को कड़ी मेहनत, स्वावलंबन और आत्मसम्मान के लिए संघर्ष करने की दीक्षा दी। उनके इस निष्काम, त्यागी और महान मातृत्व को नमन करते हुए देश-विदेश की विभिन्न सामाजिक और शासकीय संस्थाओं ने उन्हें तब्बल 29 प्रतिष्ठित पुरस्कारों से अलंकृत किया। उनके जीवन का सबसे स्वर्णिम क्षण तब आया जब सन 2014 में भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभाताई पाटिल के कर-कमलों द्वारा उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विशेष सम्मानित किया गया। इसके उपरांत, सन 2021 में महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने भी राजभवन में उनके इस अतुलनीय योगदान की सराहना करते हुए विशेष सत्कार किया। एक बेहद साधारण, ग्रामीण और कष्टकारी पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सर्वोच्च शिखर तक पहुँचने की शेवराबाई की यह यात्रा हर संवेदनशील इंसान को स्तब्ध, भावुक और प्रेरित कर देती है।शेवराबाई अपने पीछे तुकाराम, भास्कर, महादेव, नामदेव, सुनील और अनिल जैसे सुसंस्कृत बेटों सहित बेटियों, बहुओं, पोते-पोतियों और नाती-पोतों से भरा-पूरा, दुखों के सागर में डूबा परिवार छोड़ गई हैं। अंतिम संस्कार के समय नायगाव, पाटस, उरुली कांचन, हवेली क्षेत्र के ग्रामीणों और पारधी समाज के अनगिनत कार्यकर्ताओं, शुभचिंतकों और नागरिकों की आंखें छलक पड़ी थीं। इस शोक सभा और अंतिम विदाई के अवसर पर डॉ. मधुकर आव्हाड, उद्योगपति जयवंत शितोळे-पाटील, सरपंच संभाजी खडके, विकास चौधरी सहित सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों ने उपस्थित होकर इस महान सावली को जड अंतःकरण से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।शेवराबाई आज भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अपने त्याग, तपस्या और संस्कारों से जो संघर्ष और ज्ञान की मशाल जलाई है, वह पारधी समाज ही नहीं, बल्कि संपूर्ण वंचित और शोषित वर्ग के अंधकारमय रास्तों पर युगों-युगों तक प्रकाश फैलाती रहेगी और आने वाली पीढ़ियों को स्वाभिमान से जीने का मार्ग दिखाती रहेगी



