जबलपुर में तेज डीजे के खिलाफ नागरिक संगठनों ने खोला मोर्चा, ‘नो डीजे’ अभियान की मांग
Civil organizations launched a campaign against loud DJ music in Jabalpur, demanding a 'No DJ' campaign.
Jabalpur news
जबलपुर शहर में डीजे के तेज शोर को लेकर अब नागरिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच समेत कई संगठनों ने जिला प्रशासन से जबलपुर में ‘नो डीजे’ अभियान शुरू करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि तेज ध्वनि प्रदूषण का असर केवल बुजुर्गों पर ही नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। बैतूल में 26 सितंबर को डीजे की तेज आवाज के बीच एक छात्रा की मौत की घटना का हवाला देते हुए संगठनों ने इस मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
– नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉक्टर पीजी नाजपांडे ने बताया कि उन्होंने कलेक्टर से मुलाकात कर डीजे पर प्रभावी नियंत्रण की मांग की है। उनका कहना है कि नागपुर में चलाए गए ‘नो डीजे’ अभियान के बाद गणेश प्रतिमा विसर्जन समारोह को शोर मुक्त बनाने का प्रयास किया गया। इसी मॉडल को जबलपुर में भी लागू करने की मांग की गई है, ताकि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में तेज ध्वनि पर नियंत्रण हो सके।डॉ. नाजपांडे के मुताबिक जबलपुर में कई जगह साइलेंस जोन निर्धारित हैं, लेकिन इसके बावजूद इन क्षेत्रों में भी तेज आवाज में डीजे बजने की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल बैठक बुलाकर ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करने और उनका सख्ती से पालन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के ध्वनि प्रदूषण से जुड़े निर्देशों के बावजूद यदि नियमों की अनदेखी होती है तो यह चिंता का विषय है।
– पीजी नाजपाण्डे, नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शन मंच
जबलपुर के CMHO डॉक्टर नवीन कोठारी ने कहा कि निर्धारित मानकों से अधिक तेज आवाज स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है। लगातार तेज ध्वनि से कानों, मानसिक स्वास्थ्य और हृदय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों के साथ-साथ हृदय, मानसिक या आंखों से जुड़ी समस्या वाले लोगों के लिए तेज आवाज विशेष रूप से परेशानी पैदा कर सकती है। CMHO ने लोगों से त्योहारों को शालीनता से मनाने और ऐसे उपकरणों के इस्तेमाल से बचने की अपील की, जिनकी तेज आवाज आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि बच्चों में तेज शोर से चिड़चिड़ापन और पढ़ाई पर ध्यान प्रभावित होने जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं।
बाइट – डॉ नवीन कोठारी, सीएमएचओ जबलपुर
विओ – एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि गणेश उत्सव से पहले शांति समिति की बैठक और थाना स्तर पर आयोजक समितियों के साथ बैठकें की गई थीं। आयोजकों से एक फॉर्म भी भरवाया गया था, जिसमें हाईकोर्ट के निर्देशों के मुताबिक निर्धारित डेसिबल और निर्धारित समय सीमा में ही साउंड सिस्टम के इस्तेमाल की बात शामिल थी।
बाइट – सूर्यकांत शर्मा, एडिशनल एसपी जबलपुर
– उन्होंने बताया कि कई आयोजकों ने नियमों का पालन किया है, जबकि नियमों का पालन नहीं करने वाले आयोजकों को पहले ही प्रतिबंधात्मक नोटिस दिए गए हैं। आने वाले दिनों में नियमों का उल्लंघन करने वाले आयोजकों और डीजे संचालकों के खिलाफ आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अब नागरिक संगठनों की ‘नो डीजे’ मुहिम और प्रशासन की कार्रवाई के बीच बड़ा सवाल यही है कि त्योहारों के दौरान ध्वनि प्रदूषण पर रोक के नियम जमीन पर कितनी सख्ती से लागू होते हैं।
जबलपुर से वाजीद खान की रिपोर्ट



