Azamgarh News:लक्ष्मण शक्ति और रामविलाप के मार्मिक मंचन ने दर्शकों को रुलाया, भाई के लिए श्रीराम की व्याकुलता देख छलक पड़े सैकड़ों लोगों के आंसू

आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय

अंश सिंह के लक्ष्मण अभिनय और उत्तम सिंह के श्रीराम किरदार ने जीवंत किया रामायण का भावुक प्रसंग, हनुमान की संजीवनी और भरत-हनुमान मिलन ने बांधा समां

आजमगढ़ सगड़ी तहसील के अजमतगढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा भटौली इब्राहिमपुर में आयोजित रामलीला में लक्ष्मण शक्ति और श्रीराम विलाप का दृश्य इतना मार्मिक और भावपूर्ण रहा कि रामलीला देखने पहुंचे सैकड़ों दर्शक भावुक हो उठे। मंच पर जब मेघनाद के शक्ति बाण से लक्ष्मण मूर्छित हुए और बड़े भाई श्रीराम अपने अनुज को सीने से लगाकर विलाप करने लगे तो महिलाओं, युवतियों, बच्चों और पुरुषों की आंखें नम हो गईं। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो रामायण का प्रसंग मंच पर नहीं, बल्कि लोगों के सामने सजीव रूप में घटित हो रहा हो।

रामलीला का प्रसंग उस समय शुरू हुआ जब अंगद लंका से लौटकर श्रीराम को रावण के युद्ध के लिए तैयार होने की सूचना देते हैं। इसके बाद श्रीराम की आज्ञा और आशीर्वाद लेकर लक्ष्मण युद्धभूमि की ओर प्रस्थान करते हैं। वहीं दूसरी ओर मेघनाद भी अपने पिता रावण की आज्ञा लेकर पूजा-पाठ के बाद युद्ध के लिए निकलता है। देखते ही देखते लक्ष्मण और मेघनाद के बीच भयंकर युद्ध शुरू हो जाता है।

युद्ध के दौरान मेघनाद द्वारा चलाए गए शक्ति बाण से लक्ष्मण मूर्छित होकर धरती पर गिर पड़ते हैं। मेघनाद उन्हें उठाकर लंका ले जाने का प्रयास करता है, लेकिन शेषनाग के अवतार लक्ष्मण को उठा नहीं पाता। इसी बीच हनुमान जी मेघनाद को हटाकर लक्ष्मण को अपनी गोद में उठाते हैं और श्रीराम के पास पहुंच जाते हैं।

लक्ष्मण को मूर्छित अवस्था में देखकर श्रीराम का हृदय व्याकुल हो उठता है। हनुमान जी बताते हैं कि मेघनाद ने शक्ति बाण से लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया है। इसके बाद श्रीराम का करुण विलाप देखकर पूरा रामलीला परिसर भावुक हो जाता है। भाई के प्रति श्रीराम का प्रेम, उनकी व्याकुलता और बार-बार लक्ष्मण को पुकारने का अभिनय दर्शकों के दिल को छू गया। कई महिलाएं और बच्चे अपने आंसू नहीं रोक सके।

इसी बीच विभीषण बताते हैं कि लंका में सुषेण वैद्य हैं, जो लक्ष्मण का उपचार कर सकते हैं। श्रीराम की आज्ञा लेकर हनुमान जी सुषेण वैद्य को लाने के लिए प्रस्थान करते हैं। संजीवनी बूटी लेकर लौटते समय भरत जी को हनुमान जी के आकाश मार्ग से आने पर भ्रम होता है और वह उन्हें बाण मारकर नीचे गिरा देते हैं। इसके बाद हनुमान और भरत का परिचय होता है। हनुमान जी बताते हैं कि वे श्रीराम के भक्त हैं और लक्ष्मण के उपचार के लिए संजीवनी बूटी लेकर जा रहे हैं। यह दृश्य भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।

इसके बाद हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर रामदल पहुंचते हैं। सुषेण वैद्य द्वारा उपचार किए जाने पर लक्ष्मण पुनः स्वस्थ होकर खड़े हो जाते हैं। लक्ष्मण के होश में आते ही रामदल में जय श्रीराम के जयकारे गूंज उठते हैं। श्रीराम के चेहरे पर प्रसन्नता लौट आती है। जब लक्ष्मण अपने बड़े भाई से पूछते हैं कि उन्हें क्या हुआ था, तब श्रीराम उन्हें पूरी घटना बताते हैं। इसके बाद लक्ष्मण पुनः श्रीराम से युद्ध में जाने की आज्ञा मांगते हैं।

इस भावपूर्ण मंचन में कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। श्रीराम की भूमिका में उत्तम सिंह, लक्ष्मण की भूमिका में अंश सिंह, भरत की भूमिका में आदित्य सिंह, शत्रुघ्न की भूमिका में मृत्युंजय सिंह, हनुमान की भूमिका में प्रखर सिंह, सुग्रीव की भूमिका में विश्वेश्वर सिंह, अंगद की भूमिका में हर्षित सिंह, विभीषण की भूमिका में देवेंद्र गुप्ता तथा सुषेण वैद्य की भूमिका में संतोष शर्मा उर्फ रिंकू शर्मा ने शानदार अभिनय किया।

वहीं रावणी सेना में रावण की भूमिका हरिशंकर उपाध्याय उर्फ टुनटुन बाबा तथा मेघनाद की भूमिका शिबू सिंह ने निभाई। सभी कलाकारों ने अपने संवाद, भाव-भंगिमा और अभिनय से रामायण के इस प्रसंग को यादगार बना दिया। वानरी सेना के कलाकारों ने भी मंचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

रामविलाप के दौरान श्रीराम के रूप में उत्तम सिंह की करुण अभिव्यक्ति और लक्ष्मण के रूप में अंश सिंह का सजीव अभिनय विशेष रूप से चर्चा का विषय रहा। हनुमान की भूमिका में प्रखर सिंह तथा भरत की भूमिका में आदित्य सिंह ने भी दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।

रामलीला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि रिश्तों, त्याग और भाईचारे का संदेश भी है। भटौली इब्राहिमपुर की रामलीला में कलाकारों ने यह संदेश अपने अभिनय के माध्यम से लोगों के हृदय तक पहुंचाया। दूर-दराज से आए सैकड़ों दर्शक लक्ष्मण शक्ति और रामविलाप का दृश्य देखकर भावविभोर हो गए।

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