पाक-चीन के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के उल्लेख पर सवाल उठाने का भारत को हक नहीं : पाकिस्तानी विदेश मंत्री

India has no right to question Jammu and Kashmir mention in Pak-China joint statement: Pakistani Foreign Minister

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इस्लामाबाद, 20 जून। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान-चीन के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के उल्लेख पर सवाल उठाने का भारत के पास “कोई अधिकार या आधार” नहीं है। यह टिप्पणी बीजिंग में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके चीनी समकक्ष ली कियांग के बीच वार्ता के बाद 8 जून को जारी संयुक्त बयान के संदर्भ में की गई है।

 

 

 

 

 

 

 

 

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है, “यह एक स्थापित तथ्य है कि जम्मू-कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादित क्षेत्र के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह विवाद सात दशकों से अधिक समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडा में शामिल है।”

 

 

 

 

 

 

 

बयान में कहा गया है, “सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर पर अंतिम फैसला संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में कराये जाने वाले स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जनमत संग्रह से लोगों की इच्छा के आधार पर लिया जाएगा।”

 

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर भारत का दावे का “कोई आधार नहीं है”।

 

 

 

 

 

 

 

पाकिस्तान और चीन के 8 जून को जारी संयुक्त बयान में कहा गया था कि “जम्मू-कश्मीर का विवाद लंबे समय से अनसुलझा है, और इसका सही तथा शांतिपूर्ण तरीके से समाधान किया जाना चाहिए”।

 

भारत ने बयान में जम्मू-कश्मीर के उल्लेख को “अनुचित” बताया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 13 जून को कहा था, “हमने 7 जून 2024 को चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के अनुचित उल्लेख को देखा है। हम इस तरह के उल्लेख को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं। इस मसले पर हमारा रुख हमेशा से एक सा रहा है जो दोनों पक्षों को अच्छी तरह से पता है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्रशासित प्रदेश हमेशा से भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं और रहेंगे। किसी और देश को इस पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।”

 

 

 

 

 

 

 

 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “इसी संयुक्त वक्तव्य में तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के तहत गतिविधियों और परियोजनाओं का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें से कुछ भारत के संप्रभु क्षेत्र में हैं, जिन पर पाकिस्तान ने जबरन और अवैध कब्जा कर रखा है। हम इन क्षेत्रों पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे को मजबूत करने या वैध बनाने के लिए अन्य देशों द्वारा उठाए गए किसी भी कदम का दृढ़ता से विरोध करते हैं और उसे अस्वीकार करते हैं, जो भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर आघात करता है।”

 

 

 

 

 

 

 

जम्मू-कश्मीर पर पाक-चीन संयुक्त वक्तव्य में किए गए संदर्भों की भारत की आलोचना के बाद सीमा पार कूटनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस्लामाबाद ने नई दिल्ली को आड़े हाथों लिया और कहा कि उसे “सीपीईसी पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने” की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

 

 

 

 

 

 

 

सीपीईसी चीन की महत्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) पहल की एक प्रमुख परियोजना है और पाकिस्तान तथा उसके आर्थिक विकास उद्देश्यों के लिए इसका बहुत महत्व है।

 

 

 

 

 

 

 

पाकिस्तान विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलूच ने कहा, “सीपीईसी के बारे में निराधार दावे करने की बजाय, भारत को जल्द से जल्द जम्मू-कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों को लागू करना चाहिए।”

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