सूर्य उपासना डाला छठ सात एवं आठ नवंबर को, आचार्य अनिल मिश्र

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विनय मिश्र,जिला संवाददाता।

 

देवरिया। आचार्य अनिल मिश्रा ने बताया कि वर्तमान काल का वर्ष भर का सबसे लोकप्रिय पर्व डाला छठ (छठ पूजा) ७ नवंबर २०२४ गुरुवार को होगी। यह एक ऐसा व्रत पर्व है जिसमें कोई शास्त्रीय एवं कर्मकाण्डीय विधि नहीं है। अपितु यह लोकरीति, कुल परंपरा एवं अपार श्रद्धा का समावेशी पर्व है जो महिलाएं अत्यंत पवित्रता एवं सुचिता के साथ परिवार के पुरुष सदस्यों के सहयोग से अत्यंत कठिन रीति रिवाज के साथ संपन्न करती हैं।

रात भर की तपपूर्ण प्रतीक्षा के बाद अरुणोदय समय भगवान भास्कर एवं छठी माता को द्वितीय अर्घ्य देकर ८ नवंबर २०२४ शुक्रवार को इस व्रत को समाप्त कर पारण कर लिया जाएगा। अर्घ्य देने का मंत्र निम्न है —

नमोऽस्तु सूर्याय सहस्र भानवे,

नमोऽस्तु वैश्वानरजातवेदसे।

त्वमेव चार्घ्यं प्रतिगृह्ण गृह्ण

देवाधिदेवाय नमोऽनमस्ते।।

आज ही जायसवाल समाज सहस्रार्जून (सहस्त्रबाहु) जयन्ती धूमधाम के साथ मनायेगा।

गोपाष्टमी का पर्व ९ नवंबर २०२४ शनिवार को मनाया जाएगा। आज ही रात्रि ६:३१ बजे से अयोध्या मथुरा की परिक्रमा प्रारम्भ हो जाएगी।

अक्षय नवमी का पुण्य पवित्र पर्व १० नवंबर २०२४ रविवार को मनाया जाएगा। आज के दिन आंवला वृक्ष के नीचे स्वादिष्ट पक्वान्न बनाकर ब्राह्मणों को खिलाने तथा भोजन दक्षिणा देकर सपरिवार भोजन करने का पुण्य फलदायक विधान है। बंगाल में इसे जगतधात्री पूजा के नाम से जाना जाता है। आज ही श्रीविष्णु त्रिरात्रि आरंभ हो जाएगी। आज के दिन रत्नगर्भ कुष्मांडा (कोहड़ा/काशीफल) दान करने का विधान है। अयोध्या मथुरा की परिक्रमा सायं ४:४४ बजे समाप्त हो जाएगी।

श्री हरि प्रबोधिनी एकादशी व्रत का मान सबके लिए १२ नवंबर २०२४ मंगलवार को होगी। इसे दिठवन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।आज सृष्टि के मालिक एवं भरण पोषण करने वाले श्रीहरि विष्णु का विधिवत् पूजन कर उनको योग निद्रा से जगाया जाएगा। इसमें निम्न मंत्र का प्रयोग किया जाता है —–

ब्रह्मेन्द्ररुद्राग्निकुबेरसूर्य:

सोमादिभिर्वन्दितवन्दनीय।

बुध्यस्य देवेश जगन्निवास

मन्त्र प्रभावेण सुखेन देव।।

इयन्तु द्वादशी देव प्रबोधनार्थ विनिर्मिता।

त्वयैव सर्वलोकानां हितार्थ शेषशायिना।।

उत्तिष्ठोतिष्ठ गोविन्द त्यजनिद्रां जगत्पते।

त्वयिसुप्ते जगन्नाथ जगत्सुप्तं भवेदिदम।।

उत्थिते चेष्ठते सर्वमुक्तिष्ठोतिष्ठ माधव।

गतिमेधा वियच्चैव निर्मलं निर्मला दिश:।।

शारदानि च पुष्पाणि गृहाण मम केशव।

इदं विष्णुरिति प्रोक्तो मन्त्र उत्थापने हरे: ।।

–(वाराह पुराण)–

इसी के साथ चातुर्मास्य व्रत की समाप्ति हो जायेगी तथा निम्न मंत्र से भगवान विष्णु को समर्पित किया जाएगा —

इदं व्रतं मया देव कृतं प्राप्तं तव प्रभो।

तेन मे पूर्णतां यातु त्वत्प्रसादाज्जनार्दन:।।

भद्रा दिन में १२:३६ बजे के बाद गन्ने का पूजन कर उसका सेवन किया जाएगा। तुलसी शालिग्राम का विवाह उत्सव परम्परागत तरीके से मनाया जाएगा तथा इसका क्रम पूर्णिमा तक चलता रहेगा। एकादशी तिथि में अयोध्या के अंतर्गृही परिक्रमा भी की जाएगी।

प्रदोष का व्रत १३ नवम्बर २०२४ बुधवार को किया जाएगा। आज ही एकादशी व्रत का पारणा प्रातः ६:३५ बजे से सङ्गवकाल अर्थात् ८:४५ बजे तक कर लिया जाएगा। इसे नारायण द्वादशी एवं उड़ीसा में गरुण द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है।

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