आजमगढ़:भारतीय संस्कृति और सभ्यता की मूल जननी है संस्कृत भाषा

रिपोर्ट: सौरभ उपाध्याय

आजमगढ़, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ के तत्वाधान में चल रहे त्रैमासिक पौरौहित्य प्रशिक्षण का आयोजन श्री भवानंद संस्कृत महाविद्यालय जहानागंज के सभागार में किया गया, कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्र अध्यक्ष डॉ अजीत पांडेय, प्रशिक्षक राहुल उपाध्याय, ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित करके किया, पौरौहित्य प्रशिक्षक राहुल उपाध्याय ने कहा कि संस्कृत भाषा देववादी भाषा है, और आज के समय में संस्कृत भाषा पढ़ने वाले का भविष्य उज्जवल है, जो लोग संस्कृत पढ़ रहे हैं उनको किसी प्रकार की रोजी-रोटी में समस्याएं नहीं उत्पन्न हो रही है,उत्तर प्रदेश की सरकार लगातार संस्कृत से युवाओं को जोड़ने का भरपूर प्रयास कर रही है, हमारे भारत देश के सभी हिंदू धर्म के ग्रंथ संस्कृत भाषा में ही है, संस्कृत भाषा जो जानता है वही कर्मकांड ज्योतिष का विशेष ज्ञाता होता है, आगे उपाध्याय ने कहा कि जितने लोग संस्कृत भाषा से जुड़ना चाहते हैं वह जोड़कर संस्कृत पढ़ लिखकर अपने जीवन को सफल मार्ग पर ले जा सकते हैं, लगातार हमारे द्वारा समय-समय पर हजारों लोगों को प्रशिक्षण में बुलाकर प्रशिक्षित किया जाता है जो लोग प्रशिक्षण में आकर शिक्षा प्राप्त कर लेते हैं, वह संस्कार के रूप में विकसित होते रहते हैं, संस्कृत भाषा ही हमें संस्कारवान गुणवान ,कर्तव्य वान बनती है केंद्र अध्यक्ष अजीत पांडे ने कहा कि हमारे जीवन में संस्कृत भाषा का ज्ञान होना बहुत ही जरूरी है, पंडित नंदेश्वर मिश्रा ने कहा कि छात्र यहां पर पुरोहित का प्रशिक्षण प्राप्त करके समाज में लोगों के यहां कर्मकांड व पूजा पाठ के महत्व को समझ कर अपने पैर पर खड़ा हो जाएंगे, हिंदू धर्म के महत्व को लोगों को समझाएंगे, इस अवसर पर दिनेश पांडे, अमरीश पांडेय, अभिनंदन, साहित सैकड़ो लोग उपस्थित थे।

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