Deoria news, बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक संपन्न
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बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक सम्पन्न
देवरिया।
कलेक्ट्रेट सभागार, देवरिया में “बाल विवाह मुक्त भारत” राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) रामशंकर द्वारा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) प्रेम नारायण सिंह ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बाल विवाह की रोकथाम, संबंधित कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जनपद को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाने पर बल दिया।
जिला परिवीक्षा अधिकारी अनिल कुमार सोनकर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बाल विवाह के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित कर अधिकाधिक जन-जागरूकता कार्यक्रम एवं प्रतिज्ञा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक कुप्रथा है, जिसे जन-जागरूकता के माध्यम से समाप्त किया जा सकता है। बैठक की अध्यक्षता कर रहे अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) ने कहा कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार समस्त संबंधित विभागों को पत्र जारी कर प्रत्येक दिन आयोजित गतिविधियों एवं प्रतिज्ञा कार्यक्रमों की जानकारी महिला कल्याण विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएंगे। साथ ही जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक पृथक समीक्षा बैठक आयोजित किए जाने तथा देवरिया सोशल मीडिया ग्रुप के माध्यम से बाल विवाह रोकथाम संबंधी संदेश साझा किए जाने का भी प्रस्ताव रखा गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी अदीश मिश्र ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं विभागीय समन्वय से अभियान को पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने जनपद में बाल विवाह को बढ़ावा देने वाले संभावित हॉटस्पॉट एवं विशेष समूहों की पहचान कर उनके बीच जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
एडीओ (आईएस) नितेश पाण्डेय एवं उप प्रधानाचार्य महेन्द्र कुमार ने बताया कि विद्यालयों में बाल विवाह की रोकथाम हेतु निरंतर प्रचार-प्रसार एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सावित्री राय एवं सदस्य विवेकानन्द मिश्र ने कहा कि समिति के समक्ष प्रस्तुत मामलों में बच्चों को प्रायः बाल विवाह की जानकारी नहीं होती, इसलिए रोकथाम के लिए व्यापक जन-जागरूकता आवश्यक है।
अधिवक्ता देवेन्द्रधर द्विवेदी ने अभियान में पूर्ण सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि महिला कल्याण विभाग द्वारा दिए गए सभी सुझावों को संस्था द्वारा प्रभावी रूप से लागू कराया जाएगा।
ग्रंथी दामोदर सिंह (सिख गुरुद्वारा, न्यू कॉलोनी) ने कहा कि बेटियों को समाज में सम्मान, शिक्षा और समान अधिकार प्राप्त करना उनका मौलिक अधिकार है। धर्म में बेटी को जगत जननी का स्थान दिया गया है।
यूनिसेफ मंडल बाल संरक्षण सलाहकार शैलेष प्रताप सिंह (गोरखपुर) ने पीपीटी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जनपद एवं प्रदेश की प्रगति की स्थिति बताते हुए कहा कि सभी विभागों की सक्रिय सहभागिता से जनपद बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। प्रत्येक विभाग को अपनी कार्ययोजना के अनुसार अभियान में योगदान देना होगा।
बैठक का संचालन संरक्षण अधिकारी जय प्रकाश तिवारी ने किया। उन्होंने बताया कि बाल विवाह मुक्त भारत राष्ट्रीय अभियान 27 नवंबर 2025 से 8 मार्च 2026 तक 100 दिवसीय विशेष अभियान के रूप में संचालित किया जा रहा है। अभियान को तीन चरणों में विभाजित किया गया है—
पहला चरण में शैक्षणिक संस्थान, दूसरा चरण में धार्मिक स्थलों के धर्मगुरु, तथा तीसरा चरण में ग्राम पंचायत एवं वार्ड स्तर पर जागरूकता एवं प्रतिज्ञा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि बाल विवाह में दोषी पाए जाने पर दो वर्ष तक का कारावास एवं एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष एवं लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है। आमजन से अपील की गई कि किसी भी बाल विवाह की सूचना मिलने पर 1098, 181 अथवा 112 पर तत्काल सूचना दें।
बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जेल प्रशासन, पंचायती राज, समाज कल्याण, महिला कल्याण, शिक्षा, खेल, यूनिसेफ, चाइल्ड हेल्पलाइन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, बाल विवाह टास्क फोर्स के सदस्य एवं संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे।



