आजमगढ़ में गोवंश संरक्षण पर सख्त निर्देश, जिलाधिकारी की समीक्षा बैठक
बायो-फेंसिंग से बढ़ेगी सुरक्षा, समाज की भागीदारी को मिलेगा बढ़ावा

आजमगढ़,16 अप्रैल 2026जिलाधिकारी रविंद्र कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में गोवंशों से संबंधित जिला स्तरीय अनुश्रवण, मूल्यांकन एवं समीक्षा समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में जनपद के विभिन्न गोआश्रय स्थलों में संरक्षित निराश्रित गोवंशों के संरक्षण, भरण-पोषण एवं व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि गोआश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंशों को श्रेणीवार—नर, मादा, बीमार/अशक्त एवं बछड़ों—अलग-अलग रखा जाए, ताकि उनकी समुचित देखभाल सुनिश्चित हो सके। जिन गोआश्रय स्थलों में 100 से कम गोवंश संरक्षित हैं, उनका विस्तार कर क्षमता 100 से अधिक करने के निर्देश दिए गए। साथ ही जिन स्थलों पर टैग भूमि उपलब्ध नहीं है या कम है, वहां किसानों से अनुबंध कर हरे चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।जिलाधिकारी ने एस०एफ०सी० पूलिंग की विकास खंडवार समीक्षा करते हुए निराश्रित गोवंशों के भरण-पोषण हेतु फंड की उपलब्धता एवं समय से मांग भेजने पर जोर दिया। निर्माणाधीन गोआश्रय स्थलों को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश भी दिए गए।ग्रीष्म ऋतु को दृष्टिगत रखते हुए जिलाधिकारी ने गोआश्रय स्थलों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि गोवंशों को हीट वेव से बचाने हेतु शेड को ग्रीन पर्दा/बोरे आदि से कवर कर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाए। पूर्व में स्थापित फॉगर्स एवं पंखों की मरम्मत/सर्विसिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने आश्रय स्थलों में स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने, पानी, गोबर एवं गोमूत्र की समुचित निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने कहा कि गोवंशों के लिए पर्याप्त मात्रा में भूसा, पौष्टिक हरा चारा, संतुलित पशु आहार, गुड़ एवं नमक की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही प्रत्येक गोआश्रय स्थल पर छायादार वृक्षारोपण वन विभाग के सहयोग से कराया जाए, जिससे प्राकृतिक रूप से भी गर्मी से बचाव हो सके।पीने के पानी की शुद्धता पर बल देते हुए जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि स्वच्छ एवं ताजा पानी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा चरही में संग्रहित पानी को निर्धारित अंतराल पर बदला जाए। पानी में मानक के अनुसार चूने का प्रयोग भी किया जाए। रात्रिकालीन गोसेवकों की उपस्थिति सुनिश्चित कर निरंतर निगरानी के निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ने आगामी 06 माह के लिए भूसा भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु समस्त खंड विकास अधिकारियों एवं ग्राम प्रधानों को एक सप्ताह के भीतर भूसा स्टोरेज की व्यवस्था पूर्ण करने के निर्देश दिए। गोआश्रय स्थलों की सुरक्षा हेतु बाउंड्रीवाल के स्थान पर बायो-फेंसिंग अपनाने को कहा गया। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि गोवंशों के लिए भूसा दान करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा, जिससे समाज की सहभागिता को बढ़ावा मिल सके।बैठक में मुख्य राजस्व अधिकारी संजीव ओझा, जिला विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह, प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सहित पशुपालन विभाग के समस्त चिकित्सक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।



