यूपीएल को भारत में बायोक्लासिक® के लिए मिला एफसीओ पंजीकरण, जैव-उत्पादों के पोर्टफोलियो का हुआ विस्तार
UPL receives FCO registration for BioClassic® in India, expanding its portfolio of bio-products

Mumbai, 5th June, 2026 – वहनीय कृषि उत्पादों के लिहाज़ से वैश्विक नेतृत्व वाली कंपनी, यूपीएल को अपनी सहायक कंपनी, एसडब्ल्यूएएल के ज़रिए, बायोक्लासिक® के लिए फर्टिलाइज़र कंट्रोल ऑर्डर (एफसीओ) पंजीकरण मिला है। बायोक्लासिक® एनपीपी का प्रमुख बायोस्टिमुलेंट (पौधों की वृद्धि में सहायक) है। गौरतलब है कि एनपीपी, यूपीएल का पौधों की सुरक्षा करने वाले प्राकृतिक जैव समाधान से जुड़ा कारोबार है। यूपीएल को मिले इस पंजीकरण से, अब बायोक्लासिक® देश भर के किसानों के लिए उपलब्ध होगा। इस उपलब्धि के साथ, यूपीएल को देश के तेज़ी से बढ़ते जैव समाधान (बायोलॉजिकल्स) खंड में विज्ञान-आधारित, नियमों का पालन करने वाले नेतृत्व के तौर पर अपनी स्थिति को और मज़बूत करने में मदद मिलेगी।
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बायोक्लासिक® को विशेष किस्म की फर्मेंटेशन (किण्वन) प्रक्रिया के ज़रिये घुलनशील घोल (कंसंट्रेट) के रूप में तैयार किया गया है। इस बायोस्टिमुलेंट को पौधे के बढ़ने के चरण (वेजिटेटिव स्टेज) के दौरान दो बार, बहुत कम मात्रा में इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है, ताकि पौधे की शाखें तेज़ी से फैले और पौधों को प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) में तीव्रता प्रदान की जा सकें | इससे ज़रूरी तत्वों का संचय बढ़ता है, पौधों का स्वस्थ्य बढ़ता हैं, तनाव कम होता है और पैदावार बढ़ती है।
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बायोक्लासिक® के परीक्षण (फील्ड ट्रायल) के दौरान पाया गया कि यह अलग-अलग तरह की जलवायु और मिट्टी की स्थितियों में समान रूप से असरदार है। इस बायोस्टिमुलेंट को पारंपरिक स्प्रेयर के ज़रिये इस्तेमाल करना बेहतर होता है। साथ ही, जहां अनुमति हो वहां लागू एसओपी के अनुसार ड्रोन-आधारित प्लेटफॉर्म के ज़रिये भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
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यूपीएल एसएएस के सीईओ, रविशंकर चेरुकुरी ने कहा, “भारतीय किसानों को अक्सर विभिन्न किसम की चुनौतियों का सामना करना पड़ता हैं जैसे अत्यधिक गर्मी, या अपेक्षाकृत अधिक क्षारीय मिट्टी | बायोक्लासिक® को इन्हीं चुनौतियों का समाधान करने लिए बनाया गया है। हर प्रकार के क्षेत्रों, और वैज्ञानिक रिसर्च और मान्यकरण पर आधारित
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बायोक्लासिक® का पंजीकरण, खेती को सुनियोजित बनाने में जैव उत्पादों की बढ़ती क्षमता को उजागर करता है। इससे वैज्ञानिक रूप से मान्य, नियमों का पालन करने वाले समाधान पेश करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की भी पुष्टि होती है, जिससे वहनीयता बढ़ती है।”
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यूपीएल की वैश्विक एनपीपी कारोबारी इकाई के प्रमुख, अनिल रोहरा ने कहा, “बायोक्लासिक® यूपीएल के प्रोन्यूटिवा® दृषिटकोण का अभिन्न अंग है, जो सतत खेती को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक फसल सुरक्षा उत्पादों को उन्नत जैव-समाधानों के साथ जोड़ता है। बायोक्लासिक®संसाधनों की दक्षता में सुधार कर और फसल के लंबे समय तक स्वस्थ रहने में सहायता कर तिलहन, दलहन और सब्ज़ियों की खेती के लिए बेहद मददगार साबित हो सकता है।”
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यूपीएल को भारत में, बायोक्लासिक® के अलावा, चार और बायोस्टिमुलेंट – ऑप्टीने®, गैक्सी, मैकेरेना® और पिलैटस® – के लिए पंजीकरण की मंज़ूरी मिल गई है। यह यूपीएल के जैव-समाधान पोर्टफोलियो का बड़ा विस्तार है। ऐसी मंज़ूरियों से, भारत में कृषि की मदद और वहनीय, विज्ञान-आधारित तत्वों को बढ़ावा देने के प्रति यूपीएल की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है | परिणामस्वरूप किसानों को जलवायु परिवर्तन के अनुसार ढलने, मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और फसलों की कुल पैदावार बढ़ाने में मदद मिलती है।.



