Azamgarh News:खरीफ फसलों की बुआई से पहले भूमिशोधन एवं बीजशोधन अपनाएं किसान, कृषि विभाग ने जारी की सलाह*

आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय

*खरीफ फसलों की बुआई से पहले भूमिशोधन एवं बीजशोधन अपनाएं किसान, कृषि विभाग ने जारी की सलाह*

*धान, मक्का, अरहर सहित खरीफ फसलों को कीट एवं रोगों से बचाने के लिए वैज्ञानिक विधियों का करें प्रयोग: जिला कृषि रक्षा अधिकारी*

आजमगढ़ 10 जून 2026/

जिला कृषि रक्षा अधिकारी हिमाचल सोनकर ने कृषि निदेशालय उ0प्र0 कृषि भवन लखनऊ द्वारा दिये गये निर्देशों के अनुपालन क्रम मंे जनपद के प्रिय किसान भाईयों को सूचित किया है कि वर्तमान समय में खरीफ सीजन में प्रमुख रुप से बुआई/रोपाई की जाने वाली फसलों यथा धान, मक्का, अरहर, मूंग, उर्द, लोबिया, गन्ना एवं तिल आदि की खेती की जाती है। फसलों की बुआई किये जाने पूर्व अपनायी जाने वाली विधियां एवं फसलों में सामयिक रुप से लगने वाले कीट/रोग से बचाव हेतु निम्नलिखित सुझाव एवं संस्तुतियां निम्नवत है।

ट्राइकोडर्मा हरजेनियम 2%WP- धान, मक्का, अरहर, उर्द, मंूग एवं गन्ना की बुआई से पूर्व भूमिशोधन आवश्यक रुप किया जाना चाहिए, जिसमें ट्राइकोडर्मा का प्रयोग मृदाजनित रोगों से बचाव के लिये 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेअर 75 किग्रा गोबर की सड़ी हुई एवं नमीयुक्त खाद में मिलाकर 6-7 दिन तक धूप रहित स्थान ढककर रखना चाहिए। तद्पश्यात अन्तिम जुताई के समय अथवा बुआई के पहलें खेत में छिड़कर मिट्टी में मिला दें।

*लाभ-* जैविक विधि को अपनाने से भूमिजनित रोगों से बचाव होती है एवं जड़ों का विकास होता है, पर्यावरण, प्रदूषण से रक्षा होती है तथा भूमि का स्वास्थ्य अच्छा एवं उत्पादकता में वृद्धि होती है। मिट्टी के भौतिक गुण-रचना कणाकार, सुघट्यता, जल अवशोषण का सुधार होता है।

*ब्युबेरियाबैसियाना 1%wp-* इसका प्रयोग करके दीमक, सफेद गिडार, सूत्रकृमि, जड़ की सूड़ी, कटवर्म आदि कीटों से बचाव हेतु उपयोग किया जा सकता है। ब्युबेरियाबैसियाना को 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेअर 75 किग्रा गोबर की सड़ी हुई एवं नमीयुक्त खाद में मिलाकर 6-7 दिन तक धूप रहित स्थान ढककर रखना चाहिए। तद्पश्यात अन्तिम जुताई के समय अथवा बुआई के पहलें खेत में छिड़कर मिट्टी में मिला दें।

*एजेटोबैक्टर फॉसपेटिका, एजोस्पाइरिलम-* इसका प्रयोग 04-05 किग्रा कल्चर लेकर 35-50 किग्रा गोबर की सड़ी हुई भूरभूरी खाद में मिलाकर जूट के बोरे से मिलाकर ढककर रख दें। तद्पश्चात अन्तिम जुताई के समय या पहली सिंचाई के पहले छिड़ककर मिट्टी में मिला दें।

*लाभ-* जैव उर्वरक विधि से भूमिशोधन करने से मिट्टी के लाभदायक सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ती है। वायुमण्डल के नाइट्रोजन को पौधों की जड़ों तथा मिट्टी मंे संचित होने में सहायता मिलती है। पौधों की दैहिक क्रिया में वृद्धि होती है। मिट्टी मंे उपस्थित न उपलब्ध होने वाले पोषक तत्वों को उपलब्ध करानें में सहायता मिलती है, मृदा संरचना में सुधार होता है तथा फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।

प्रिय किसान बन्धु नर्सरी डालने से पूर्व बीजशोधन अवश्य कर लें, इसके लिये जहॉ पर जीवाणु झुलसा रोग की समस्या हो वहॉ पर स्ट्रेप्टोमासिन सल्फेट 9%+ टेट्रासाइक्लिन हाइड्रोक्लोराइड 10% की 4 ग्राम मात्रा को प्रति 25 किग्रा की दर से 100 लीटर पानी में मिलाकर रातभर मिला दें, दूसरें दिन छाया में सूखा नर्सरी डालें। जहॉ फफॅूद सम्बन्धी समस्या हो वहॉ 25 किग्रा धान की बीज को रात भर पानी में भिगोने के बाद दूसरे दिन निकाल कर अतिरिक्त पानी निकल जाने के बाद 62.5 ग्राम थीरम अथवा 50 ग्राम कारबेण्डाजिम को 08-10 लीटर पानी में घोलकर बीज में मिला देना चाहिए। इसके बाद छाया में अंकुरित करके नर्सरी में डाली जायेगी। इसके अलावा बीजशोधन हेतु 4.5 ग्राम प्रति किग्रा बीज के लिये ट्राइकोडर्मा का भी प्रयोग किया जा सकता है यदि अंकुरण प्रभावित है तो बीज को जिब्रेलिक ऐसिड से बीज को शोधित करें।

उपरोक्त विषय में प्रिय किसान भाई विशेष जानकारी हेतु कृषि विभाग/कृषि रक्षा अनुभाग के विकास खण्ड स्तर पर तैनात क्षेत्रीय कार्मिक वरिष्ठ प्राविधिक सहायक ग्रुप-बी (कृ0र0/कृषि) से व्यक्तिगत सम्पर्क करके अथवा विशेष परिस्थितियों में जनपद स्तर पर इस कार्यालय में तैनात श्री मनीष कुमार दुबे, प्रभारी कृषि रक्षा केन्द्र आजमगढ़ के मोबाईल नम्बर-9415394321 पर अथवा जिला कृषि रक्षा अधिकारी के मोबाईल नम्बर-80290100968 पर सम्पर्क करके प्राप्त किया जा सकता है।

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