आजमगढ़:कटाई गांव में पसरा मातम: दिल्ली में हादसे का शिकार हुए रवि सिंह का शव गांव पहुंचते ही मचा कोहराम, मणिकर्णिका घाट पर नम आंखों से हुआ अंतिम संस्कार
Azamgarh: Mourning spreads in Katai village: Chaos erupts as the body of Ravi Singh, who died in an accident in Delhi, reaches the village; the last rites are performed with tearful eyes at Manikarnika Ghat.

पल्हना (आजमगढ़)। मेहनगर थाना क्षेत्र के कटाई गांव में उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब दिल्ली में एक दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले 35 वर्षीय रवि सिंह का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। शव के गांव पहुंचते ही पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। हर ओर चीख-पुकार और मातम का दृश्य देखने को मिला। परिजनों का करुण क्रंदन सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। गांव के लोगों का कहना था कि रवि सिंह न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक मिलनसार, मेहनती और मददगार व्यक्ति थे। उनकी असमय मृत्यु ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार मेहनगर थाना क्षेत्र के कटाई गांव निवासी रवि सिंह, पुत्र जीत बहादुर सिंह, पिछले कई वर्षों से दिल्ली में रहकर भवनों की विद्युत वायरिंग का ठेका लेने का कार्य करते थे। उन्होंने अपनी मेहनत और ईमानदारी के बल पर दिल्ली में अच्छी पहचान बनाई थी। रवि सिंह अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभा रहे थे। उनके साथ काम करने वाले लोगों का कहना है कि रवि अपने व्यवहार, कार्यकुशलता और सरल स्वभाव के कारण सभी के प्रिय थे। वह हमेशा दूसरों की सहायता के लिए तैयार रहते थे।बताया जाता है कि 15 जुलाई की रात रवि सिंह अपने किराए के मकान की छत पर टहलने गए थे। इसी दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया और वह ऊंचाई से नीचे गिर पड़े। गिरने की आवाज सुनकर आसपास के लोग तत्काल मौके पर पहुंचे और गंभीर रूप से घायल रवि को नजदीकी अस्पताल ले गए। चिकित्सकों ने पूरी कोशिश की, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।जैसे ही रवि सिंह की मौत की सूचना उनके परिजनों और गांव वालों को मिली, पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई। किसी को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि हमेशा मुस्कुराने वाला, मेहनती और परिवार का सहारा बनने वाला रवि अब इस दुनिया में नहीं रहा। घटना की जानकारी मिलते ही रिश्तेदारों, मित्रों और शुभचिंतकों का उनके घर पहुंचना शुरू हो गया। गांव के लोगों ने बताया कि रवि सिंह का स्वभाव इतना अच्छा था कि उनके निधन की खबर सुनते ही आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे।रवि सिंह के पिता जीत बहादुर सिंह लंबे समय से हिंदुस्तान समाचार पत्र से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार हैं। उनके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा पूरे क्षेत्र में है। बेटे की असामयिक मृत्यु ने पिता को पूरी तरह तोड़ दिया। जो पिता जीवनभर दूसरों के दुख-दर्द की खबरें लिखते रहे, आज वही अपने जीवन के सबसे बड़े दुख से गुजर रहे हैं। बेटे के निधन की खबर सुनने के बाद से ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।17 जुलाई को जब रवि सिंह का पार्थिव शरीर दिल्ली से उनके पैतृक गांव कटाई लाया गया तो गांव में हजारों की संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। जैसे ही एंबुलेंस गांव पहुंची, पूरे माहौल में सन्नाटा छा गया। परिवार के लोगों का विलाप सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा। पत्नी श्वेता सिंह अपने पति के पार्थिव शरीर से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगीं। उनकी चीख-पुकार सुनकर वहां उपस्थित लोगों की आंखें भर आईं। मां पूनम सिंह भी बेटे के शव को देखकर बेसुध हो गईं। बार-बार वह यही कहती रहीं कि उनका बेटा उन्हें छोड़कर इतनी जल्दी कैसे चला गया।रवि सिंह की पांच वर्षीय मासूम पुत्री सिया अभी इतनी छोटी है कि वह इस असहनीय दुख को पूरी तरह समझ भी नहीं पा रही थी। वह कभी अपने पिता के चेहरे को देखती तो कभी आसपास खड़े लोगों की ओर। यह दृश्य वहां मौजूद प्रत्येक व्यक्ति के हृदय को झकझोर देने वाला था। गांव की महिलाओं की आंखों से भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।मृतक रवि सिंह तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। परिवार की जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा उन्हीं के कंधों पर था। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए अपने परिवार को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। गांव के लोगों का कहना है कि रवि सिंह ने हमेशा मेहनत को ही अपनी पहचान बनाया। दिल्ली में रहकर उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से रोजगार स्थापित किया और परिवार को बेहतर जीवन देने का प्रयास किया। उनका सपना था कि उनकी बेटी सिया अच्छी शिक्षा प्राप्त कर जीवन में आगे बढ़े।रवि सिंह के निधन की खबर सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैल गई। उनके परिचितों, मित्रों और रिश्तेदारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। कई लोगों ने लिखा कि रवि सिंह का जाना समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके साथ काम करने वाले सहयोगियों ने बताया कि रवि हर किसी का सम्मान करते थे और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखते थे।गांव के बुजुर्गों का कहना था कि इतनी कम उम्र में किसी युवा की इस तरह दुर्घटना में मौत पूरे समाज के लिए बेहद दुखद है। लोगों ने इसे ईश्वर की कठोर इच्छा बताते हुए परिवार को धैर्य रखने की अपील की। पूरे गांव में दिनभर किसी के घर चूल्हा तक नहीं जला। लोग शोक में डूबे रहे और लगातार रवि सिंह के घर पहुंचकर परिवार को सांत्वना देते रहे।अंतिम दर्शन के लिए रवि सिंह के पार्थिव शरीर को उनके आवास के बाहर रखा गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। हर व्यक्ति के चेहरे पर दुख साफ दिखाई दे रहा था। लोगों का कहना था कि रवि सिंह का हंसमुख स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व हमेशा उनकी यादों में जीवित रहेगा।इसके बाद परिजनों ने नम आंखों से अंतिम यात्रा निकाली। अंतिम यात्रा में गांव ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। हर कोई ‘राम नाम सत्य है’ का उद्घोष करते हुए रवि सिंह को अंतिम विदाई दे रहा था। वातावरण पूरी तरह शोकमय था। रास्ते में लोग अंतिम यात्रा रुकवाकर श्रद्धासुमन अर्पित करते रहे।रवि सिंह का अंतिम संस्कार वाराणसी के पवित्र मणिकर्णिका घाट पर पूरे वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। मुखाग्नि परिवार के सदस्य द्वारा दी गई। गंगा तट पर मौजूद लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। अंतिम संस्कार के दौरान हर किसी की आंखें नम थीं और परिजन बार-बार भावुक हो उठे।अंतिम यात्रा एवं अंतिम संस्कार में भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष ध्रुव सिंह सहित कृष्ण बिहारी सिंह, इंद्रजीत यादव, चंद्रदेव सिंह तथा अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, ग्रामवासी एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। सभी ने दिवंगत रवि सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उपस्थित लोगों ने कहा कि रवि सिंह का असमय निधन परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।गांव के लोगों ने बताया कि रवि सिंह बचपन से ही सरल, विनम्र और मेहनती स्वभाव के थे। उन्होंने कभी किसी का दिल नहीं दुखाया। गांव में जब भी आते थे, सभी लोगों से आत्मीयता से मिलते थे और हर सुख-दुख में शामिल होते थे। यही कारण है कि उनके निधन पर केवल परिवार ही नहीं बल्कि पूरा गांव शोक में डूब गया।इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जीवन कितना अनिश्चित है। जो व्यक्ति अपने परिवार के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा था, वह एक पल में इस दुनिया को अलविदा कह गया। रवि सिंह अपने पीछे वृद्ध माता-पिता, पत्नी, पांच वर्षीय पुत्री सिया, भाइयों तथा भरे-पूरे परिवार को छोड़ गए हैं। परिवार के सामने अब भावनात्मक ही नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं।शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे लोगों ने परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि पूरे क्षेत्र के लोग इस दुख की घड़ी में उनके साथ हैं। सभी ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत रवि सिंह की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय पीड़ा को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।रवि सिंह अब भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी मेहनत, ईमानदारी, सादगी और मिलनसार व्यक्तित्व की यादें हमेशा उनके परिवार, मित्रों और गांववासियों के दिलों में जीवित रहेंगी। कटाई गांव लंबे समय तक इस दर्दनाक हादसे को भूल नहीं पाएगा और गांव का हर व्यक्ति रवि सिंह को नम आंखों से याद करता रहेगा।



