Azamgarh news :अब मोबाइल से सोलर तक, युवाओं को मिलेगा विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत रोजगार का हुनर
अब मोबाइल से सोलर तक, युवाओं को मिलेगा विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत रोजगार का हुनर

दूसरे चरण में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना में 14 नए ट्रेड जोड़े गए
आजमगढ़ ब्यूरो चीफ राकेश श्रीवास्तव
बेरोजगार युवाओं को हुनरमंद बनाकर अपने पैरों पर खड़ा करने की दिशा में शासन ने विश्वकर्मा श्रम योजना 2.0 की शुरूआत की है। योजना के दूसरे चरण में 14 नए ट्रेड शामिल किए गए हैं। इनका युवा प्रशिक्षण ले सकेंगे। उद्योग विभाग के इस योजना का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं बल्कि युवाओं को हुनर से स्वरोजगार तक पहुंचाना है। चयनित अभ्यर्थियों को 10 दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।प्रशिक्षण में प्रत्येक दिन 500 रुपये कुल 5000 रुपए मानदेय दिया जाएगा।
प्रशिक्षण में युवाओं को सम्बंधित व्यवसाय की बारीकियां, काम करने की तकनीक, उपकरणों के इस्तेमाल और व्यवसाय को बेहतर ढंग से संचालित करने की जानकारी दी जाएगी। इससे प्रशिक्षण लेने वाले युवा नौकरी तलाशने के बजाय अपना काम शुरू करने के लिए तैयार हो सकेंगे।
ये ट्रेड योजना में थी शामिल-
योजना के पहले चरण में बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी समेत 11 परम्परागत ट्रेड शामिल थे। इन ट्रेडों में प्रशिक्षण देकर पारम्परिक हुनर को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा था।
नए ट्रेड हुए शामिल-
नए ट्रेडों में मूर्तिकार, मालाकार, भरभूजा, दूधवाला, मछुआरा, सहित मोबाइल मरम्मत, ऑटोमोबाइल मरम्मत, इलेक्ट्रॉनिक सामान की मरम्मत, विद्युत सामान की मरम्मत, प्लंबर, कम्प्यूटर मरम्मत, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और सौंदर्य एवं वेलनेस जैसे कार्य शामिल हैं।
उपायुक्त उद्योग आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 में परम्परागत व्यवसायों के साथ बाजार की वर्तमान मांग को ध्यान में रखते हुए नए ट्रेड शामिल किए गए हैं। चयनित युवाओं को 10 दिन का प्रशिक्षण देकर सम्बंधित कार्य में दक्ष बनाया जाएगा। विभाग का उद्देश्य प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है ताकि वे अपने हुनर के आधार पर स्थायी आय का साधन तैयार कर सकें। प्रशिक्षण प्राप्त लाभार्थियों को विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 के तहत 10 लाख तक के ऋण की सुविधा भी उपलब्ध करायी जायेगी।
परम्परागत कारीगरों की आर्थिक स्थिति, वित्तीय सीमाओं तथा सामाजिक एवं शैक्षणिक स्थिति के दृष्टिगत स्वरोजगार एवं रोजगार के माध्यम से विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने हेतु योजनान्तर्गत प्रशिक्षण प्राप्त लाभार्थियों को इकाईयों की स्थापना / विस्तारीकरण/तकनीकी उन्नयन / गुणवत्ता सुधार/पैकेजिंग आदि व्यवसायिक गतिविधियों हेतु कारीगरों को परियोजना लागत धनराशि रू0 10 लाख तक की ऋण सुविधा 15 प्रतिशत मार्जिन मनी सब्सिडी तथा अन्य सभी गारण्टी एवं बिना ब्याज के उपलब्ध करायी जायेगी। सामान्य श्रेणी के पुरुषों द्वारा परियोजना लागत का 10 प्रतिशत तथा अन्य सभी जाति के पुरुषों / महिलाओं/थर्ड जेंडर / दिव्यांगजन / भूतपूर्व सैनिक श्रेणी के लाभार्थियों द्वारा परियोजना लागत का 05 प्रतिशत स्वयं के अंशदान के रुप में बैंक में जमा करना होगा। अधिक जानकारी के लिए जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र आजमगढ़ में संपर्क करें।



