Azamgarh News:बरदह पहुंचे भोजपुरी लोकगायक वीरेंद्र यादव ‘बीरू’, बिरहा की बुलंद आवाज से बनाई अलग पहचान
बरदह पहुंचे भोजपुरी लोकगायक वीरेंद्र यादव ‘बीरू’, बिरहा की बुलंद आवाज से बनाई अलग पहचान
बिरहा की बुलंद आवाज से लोकगीतों को नई पहचान दे रहे वीरेंद्र यादव ‘बीरू’
बरदहआजमगढ़।
भोजपुरी लोक संगीत और बिरहा गायकी की पारंपरिक विरासत को अपनी बुलंद आवाज और सधी हुई प्रस्तुति से आगे बढ़ाने वाले प्रसिद्ध लोकगायक वीरेंद्र यादव ‘बीरू’ निजी कार्यक्रम के सिलसिले में बरदह पहुंचे। इस दौरान बातचीत में उन्होंने अपने संगीत सफर, बिरहा, निर्गुण गीत और शिव चर्चा भजनों से जुड़े अनुभव साझा किए।
आजमगढ़ क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले वीरेंद्र यादव ‘बीरू’ लंबे समय से भोजपुरी लोकगीत और बिरहा की परंपरा को जीवंत रखने में जुटे हैं। उनकी गायकी में ग्रामीण जीवन, सामाजिक सरोकार, धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। बिरहा के साथ ही वह निर्गुण गीत और शिव चर्चा भजन भी प्रस्तुत करते हैं।
‘बीरू’ के चर्चित गीतों में ‘रावण-मंदोदरी संवाद’, ‘ फुटल भगिया हमार’, ‘आजमगढ़ का शहीद हमारी मईया हो’, ‘बोलेला सुगनवा’, ‘गया बाबा की उत्पत्ति’ और ‘बलमुआ मोर हेराय गईलै’जौनपुर अनुराग हत्याकांड सहित कई बिरहा व लोकगीत शामिल हैं। उनके गीत ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के बीच लोकप्रिय हैं और सोशल मीडिया व यूट्यूब के माध्यम से भी बड़ी संख्या में श्रोता उनसे जुड़े हुए हैं।
वीरेंद्र यादव ‘बीरू’ की खास पहचान उनकी साफ-सुथरी और पारंपरिक लोक गायकी है। वह बिना अश्लीलता के भोजपुरी भाषा और लोक संस्कृति की मिठास को गीतों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने पर जोर देते हैं। उनके गीतों में लोक परंपरा के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश भी देखने को मिलता है।
उन्होंने बताया कि बिरहा और लोकगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि गांव-गिरांव की संस्कृति, इतिहास और सामाजिक भावनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। डिजिटल दौर में यूट्यूब और सोशल मीडिया ने लोक कलाकारों को श्रोताओं तक पहुंचने का नया मंच दिया है। इसी माध्यम से वह अपने नए गीत, बिरहा और शिव चर्चा भजन श्रोताओं तक पहुंचा रहे हैं।
बरदह आगमन के दौरान उनके प्रशंसकों और लोक संगीत प्रेमियों में भी उत्साह देखने को मिला। स्थानीय लोगों ने कहा कि वीरेंद्र यादव ‘बीरू’ जैसे कलाकार पारंपरिक भोजपुरी लोक संगीत और बिरहा की समृद्ध विरासत को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।



