Azamgarh News:बिलरियागंज में शिक्षा के मानकों पर उठे सवाल, मान्यता प्राइमरी-जूनियर की और कक्षाएं इंटरमीडिएट तक चलाने का आरोप

आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय

बिलरियागंज में शिक्षा के मानकों पर उठे सवाल, मान्यता प्राइमरी-जूनियर की और कक्षाएं इंटरमीडिएट तक चलाने का आरोप

12वीं और बीए पास युवाओं से शिक्षक का काम लेने की शिकायत, महंगी फीस, ड्रेस और किताबों के बोझ तले दब रहे अभिभावक; जांच न होने से क्षेत्रीय जनता में आक्रोश

आजमगढ़, शिक्षा को समाज की मजबूत नींव और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का आधार माना जाता है, लेकिन जब इसी शिक्षा व्यवस्था में मानकों की अनदेखी और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ की शिकायतें सामने आने लगें, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। आजमगढ़ जनपद के बिलरियागंज शिक्षा क्षेत्र में संचालित कुछ विद्यालयों को लेकर ऐसे ही गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र के कई विद्यालय निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहे हैं। कुछ विद्यालयों में प्राइमरी और जूनियर स्तर की मान्यता होने के बावजूद इंटरमीडिएट तक की कक्षाएं चलाए जाने की शिकायत है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और संबंधित नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, कुछ विद्यालयों में निर्धारित शैक्षिक मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि जहां विद्यालयों की मान्यता सीमित कक्षाओं तक है, वहां उससे आगे की कक्षाएं भी संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा कुछ संस्थानों में केवल 12वीं पास और बीए उत्तीर्ण युवक-युवतियों से शिक्षक के रूप में काम लिए जाने की शिकायत भी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित विद्यालयों की स्थिति की स्वतंत्र जांच होना आवश्यक है।

शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में शिक्षकों की योग्यता, विद्यालय की मान्यता, भवन, कक्षाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विशेष महत्व है। ऐसे में यदि कहीं नियमों की अनदेखी हो रही है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाना विभाग की जिम्मेदारी है, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके और अभिभावकों का भरोसा बना रहे।

महंगी फीस, ड्रेस और किताबों का बोझ, फिर भी शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल

अभिभावकों की परेशानी केवल विद्यालयों के मानकों तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों के प्रवेश के समय फीस, ड्रेस, किताबों और अन्य शैक्षिक सामग्री के नाम पर अभिभावकों को काफी खर्च उठाना पड़ता है। परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च करने को मजबूर हो जाते हैं। कई अभिभावक बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी जरूरतों में कटौती तक करते हैं, ताकि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें।

लेकिन जब इतनी आर्थिक मेहनत के बाद भी शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठें, तो अभिभावकों की चिंता और नाराजगी बढ़ना स्वाभाविक है। लोगों का कहना है कि विद्यालयों में सुविधाओं और बेहतर शिक्षा के नाम पर शुल्क तो लिया जाता है, लेकिन पढ़ाई की वास्तविक गुणवत्ता की भी नियमित समीक्षा होनी चाहिए। शिक्षा केवल फीस वसूलने और किताबें-ड्रेस उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों के ज्ञान, कौशल और भविष्य को संवारना उसका मूल उद्देश्य होना चाहिए।

क्षेत्रीय जनता का आरोप है कि विद्यालयों के संचालन, मान्यता और शैक्षिक व्यवस्थाओं की नियमित जांच प्रभावी ढंग से नहीं हो रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर निरीक्षण किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई हो, तो शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है। हालांकि, क्षेत्र में कुछ विद्यालय ऐसे भी बताए जा रहे हैं, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक ऐसे संस्थानों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।

इस संबंध में बिलरियागंज के खंड शिक्षा अधिकारी जगदीश यादव से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। इस कारण इस मामले में उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। संबंधित विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

बिलरियागंज शिक्षा क्षेत्र में उठ रही शिकायतों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि विद्यालयों की मान्यता, शिक्षकों की योग्यता और शैक्षिक सुविधाओं की जांच आखिर कब होगी? क्या संबंधित विभाग इन शिकायतों का संज्ञान लेकर विद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण कराएगा? क्या अभिभावकों से लिए जाने वाले शुल्क और बच्चों को दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता की समीक्षा होगी?

क्षेत्रीय जनता ने शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विद्यालयों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में यदि मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि बच्चों को उनकी कक्षा और मान्यता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।

क्योंकि शिक्षा केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी का भविष्य गढ़ने की जिम्मेदारी है। यदि इस जिम्मेदारी में लापरवाही होती है, तो उसका खामियाजा सबसे अधिक उन बच्चों को भुगतना पड़ता है, जिनकी आंखों में बेहतर भविष्य के सपने होते हैं। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इन शिकायतों पर क्या कदम उठाता है।**

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