आजमगढ़:विसर्जन के बाद जायसवाल त्रिमूहानी सेवा संघ का भव्य भंडारा

शरद पूर्णिमा के तीन दिवसीय मेले के समापन पर रात 11 बजे तक अनवरत चला भंडारा, 'जो आवे सो खावे' के भाव से उमड़ा आस्था का सैलाब

अतरौलिया (आजमगढ़)। कस्बे में शरद पूर्णिमा (पुनवासी) के अवसर पर आयोजित ऐतिहासिक तीन दिवसीय मेले के समापन और मां भगवती की प्रतिमा के विसर्जन के उपरांत गुरुवार की शाम विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। ‘जायसवाल त्रिमूहानी सेवा संघ’ की देखरेख में आयोजित इस भव्य भंडारे में क्षेत्र तथा ग्रामीण अंचलों से आए हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर माता रानी का महाप्रसाद ग्रहण किया और पुण्य के भागी बने। आयोजन समिति के वरिष्ठ सहयोगी के रूप में दुर्गा जायसवाल ने पूरे पंडाल और वितरण व्यवस्था की कमान संभाली। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन, बैठने की समुचित व्यवस्था और किसी भी भक्त को असुविधा न हो, इसकी निगरानी में वे निरंतर सक्रिय रहे। पिंटू जायसवाल ने भंडारे की आंतरिक तैयारियों, महाप्रसाद निर्माण की शुद्धता और युवा स्वयंसेवकों के समन्वय का जिम्मा बखूबी निभाया। भोजन सामग्री के प्रबंधन से लेकर वितरण के अंतिम समय तक वे सेवा भाव से डटे रहे। वरिष्ठ कार्यकर्ता अनिल कुमार जायसवाल ने भंडारे के संबंध में जानकारी देते हुए कहा:

जायसवाल त्रिमूहानी सेवा संघ का बहुत पुराना कार्यकर्ता हूँ। शरद पूर्णिमा में जो तीन दिवसीय मेला लगता है, मेले के तीसरे दिन विसर्जन के उपरांत हम लोग यह भंडारा करते हैं। यहाँ काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और भक्ति भाव से भोजन-प्रसाद ग्रहण करते हैं। लगभग 3,000 से 4,000 की संख्या में लोग आकर माता भगवती का प्रसाद ग्रहण करके अपने को धन्य करते हैं। यह भंडारा शाम करीब 7:00 बजे शुरू होता है और रात्रि 11:00 बजे तक अनवरत चलता रहता है। इसमें कोई रोक-रुकावट नहीं है जो आवे सो खावे, सब भगवती का प्रसाद पावे।”

भंडारे के लिए गुरुवार दोपहर से ही संघ के कार्यकर्ता और रसोइए महाप्रसाद तैयार करने में जुट गए थे। पूरी शुद्धता और स्वच्छता के साथ भोजन तैयार किया गया। शाम 7:00 बजे मां भगवती के भोग और जयकारों के साथ प्रसाद वितरण प्रारंभ हुआ। देखते ही देखते श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। 2,000 से लेकर 4,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने देर रात 11:00 बजे तक प्रसाद पाया। संघ के दर्जनों स्वयंसेवक कतारबद्ध तरीके से लोगों को बिठाकर आदरपूर्वक भोजन परोसते रहे। माता के जयकारों से पूरा अतरौलिया कस्बा भक्तिमय बना रहा।

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