मऊ:तमाम महीनों का सरदार हैं रमज़ान माह,गुनाहों से तौबा करने का महीना है

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रिपोर्ट:अशोक श्रीवास्तव
घोसी/मऊ:इमाम जुमा शिया जामा मस्जिद बड़ागाँव मौलाना अहमद अब्बास व मौलाना मोहम्मद अक़ील, मौलाना सैय्यद अली फ़क़री ने बताया कि महीने साल सब अल्लाह पाक़ के बनाये हुए हैं।मगर जिस तरह सारी मखलूक में अल्लाह पाक़ ने इंसान को अशरफ उल मख़लूक़ात यानि सब से बेतर इनसना को बनाया हैं।उसी तरह हर महीनों में सबसे अफ़ज़ल और सबसे बेहतर महीना रमज़ान को बताया हैं। अल्लाह ताला ने रमज़ान महीने को अपना महीना कहा हैं।ये महीना सब महीने से अफ़ज़ल व रहमतों का महीना हैं।इस महीने में चार आसमानी किताब नाज़िल हुई हैं।जिसमे तौरेत 13 रमज़ान को नाज़िल हुई हैं।तो इंजील 18 रमज़ान को एवं ज़बूर 22 रमज़ान को हुई हैं। और कुरान मज़ीद भी इसी पाक़ माह में शबे क़द्र यानी 23 रमज़ान को नाज़िल हुई हैं। बताया गया हैं कि रमज़ान की पहली तारीख को आसमान के सभी दरवाज़े खोल दिये जाते हैं।और माह के आखरी रात तक बन्द नही होते हैं।लिहाज़ा हर इंसान को अपने परवर दिगार से सच्ची नियतो और पाक़ दिल के साथ दुआ करें।इस महीने में दुआए जरूर कुबूल होती हैं।अल्लाह पाक़ अपने बन्दों पर रहमत भरी नज़र करता हैं और बन्दा जो नेक नीयत से साफ दिल से मांगता हैं अल्लाह पाक़ उसकी दुआ जरूर क़बूल करता हैं।ये पाक़ महीना रहमतों, बरकतों,एवं गुनाहों से तौबा करने का महीना हैं।इस माह में इबादत करनी चाहिये, कुरान पाक़ की तिलावत करनी चाहिए। गुनाहों से परहेज़ करते हुए ग़रीबो की मदद फ़क़ीरों एवं मिश्किनो को खाना खिलाना चाहिये।

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