एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सूरज प्रकाश गुप्त बने दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर ,

जिला संवाददाता ,देवरिया।
बाबा राघवदास भगवानदास पी जी कॉलेज आश्रम बरहज, देवरिया के दर्शनशास्त्र विभाग के प्रभारी, डॉ सूरज प्रकाश गुप्त को 8 सितंबर 2024 को विषय से संबंधित स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा विधिवत प्रोफेसर बनाया गया। डॉ गुप्त बचपन से ही अध्ययनशील एवं मेधावी छात्र रहे हैं।उन्होंने अपने शैक्षिक जीवन में हमेशा प्रथम स्थान प्राप्त किया । स्नातक एवं स्नातकोत्तर की कक्षाओं में आपने प्रथम श्रेणी प्राप्त किया है। उक्त परीक्षाओं में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने के कारण तत्कालीन प्रदेश के राज्यपाल महोदयों द्वारा आपको स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।
शिक्षा के क्षेत्र में उत्तरोत्तर प्रगति करते हुए आपनेे स्नाकोत्तर की डिग्री प्रथम श्रेणी में प्राप्त करने के साथ ही देश की उच्च शिक्षा की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा यूजीसी नेट लगातार दो बार क्वालीफाई किया। नेट की डिग्री मिलने के साथ ही बिना रुकावट के उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश कर लिया और 19 जुलाई 1999 को पूर्वांचल के सबसे प्रतिष्ठित महाविद्यालय बाबा राघवदास भगवानदास पी जी कॉलेज आश्रम बरहज,देवरिया में प्रवक्ता, दर्शनशास्त्र के रूप में अपनी सेवा का प्रारंभ किया। 1999 से लेकर आज तक डॉ गुप्त नित प्रति नए- नए कीर्तिमान हासिल करते जा रहे हैं।
महान चिंतक, विषय मर्मज्ञ, विद्वत जनों में अपनी पहचान रखने वाले, प्रशासनिक अनुभव से युक्त, उदारता की प्रतिमूर्ति, सरल एवं सहज स्वभाव वाले, मृदभाषी,अहेतुकी की कृपा बरसाने वाले, सहयोगी प्रवृत्ति के धनी, सदा मुस्कुराते रहने वाले, अध्ययनशील, महाविद्यालय के मुख्य नियंता, आदरणीय डॉ सूरज प्रकाश गुप्त का जन्म आजमगढ़ जिले के डंडवल गांव में 9 जुलाई 1974 को हुआ। बचपन से ही डॉ गुप्त की रुचि पढ़ाई- लिखाई में रही है। डॉ गुप्त सरल, सहज, शर्मीले एवं धैर्यवान रहते हुए खेलकूद जैसे क्रिकेट, कबड्डी, बैडमिंटन, हॉकी, फुटबॉल आदि में सक्रिय खिलाडी रहे हैं। 12वीं तक की शिक्षा आपने गांव से 6 किलोमीटर दूर गांधी इंटर कॉलेज कूबा से प्राप्त किया। उच्च शिक्षा के लिए आप अपना गृह त्याग कर वाराणसी चले गये।जहां आपने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी से स्नातक एवं स्नातकोत्तर की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। दोनों परीक्षाओं में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने के कारण आपको तत्कालीन राज्यपालों द्वारा स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। यह डॉ गुप्त एवं परिवार सहित गांव के सभी लोगों के लिए अत्यंत हर्ष एवं गौरव का विषय रहा।सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी हेतु आपको इलाहाबाद (वर्तमान में प्रयागराज) जाना पड़ा। जहां आप स्नाकोत्तर की पढ़ाई करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की भी तैयारी करते रहे। लेकिन भाग्य ने आपको शिक्षा के क्षेत्र में मुकाम हासिल करने के लिए चुना। अतः आज आप प्रोफेसर के रूप में हजारों विद्यार्थियों का भविष्य बना रहे हैं। अपने सरल स्वभाव एवं सहयोगी प्रवृत्ति के कारण आप छात्र-छात्राओं में अत्यधिक लोकप्रिय हैं ।आपने उच्च शिक्षा की सबसे महत्वपूर्ण उपाधि पी-एच0 डी0 की डिग्री वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से हासिल किया। आज डॉक्टर गुप्त के परिवार में उनके माता-पिता, पत्नी एवं बच्चे अत्यंत खुशहाल हैं। आपकी प्रथम पुत्री डॉ प्रांजल गुप्ता वर्तमान में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद, महर्षि देवराहा बाबा राजकीय मेडिकल कॉलेज, देवरिया में जूनियर रेजिडेंट डाक्टर के रूप में कार्यरत है।



