कितना है खतरनाक मिल्टन तूफान, जिसने अमेरिका में मचाई तबाही
How dangerous is Hurricane Milton, which caused devastation in America

नई दिल्ली। अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा तूफान ‘मिल्टन’ फ्लोरिडा के सिएस्टा शहर में तट से टकरा गया है। इस तूफान ने फ्लोरिडा में जमकर तबाही मचाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तूफान ‘मिल्टन’ की चपेट में आने से सैकड़ों घर तबाह हो गए हैं। इसके अलावा 20 लाख से अधिक घरों की बिजली भी गुल हो गई है। आइये जानते हैं तूफान ‘मिल्टन’ के बारे में, जिसने अमेरिका के फ्लोरिडा में तबाही के निशान छोड़े हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने तूफान ‘मिल्टन’ को लेकर लोगों को पहले से ही अलर्ट रहने को कहा था। उन्होंने इसे “सदी का सबसे बड़ा तूफान” बताया। इतना ही नहीं, अमेरिकी सरकार ने तूफान से निपटने के लिए प्रभावितों के ठहरने की भी व्यवस्था पहले से ही कर ली थी।
अमेरिकी राष्ट्रीय तूफान केंद्र के अनुसार, फ्लोरिडा से टकराते समय मिल्टन लेवल पांच का तूफान था, जिसे सबसे घातक माना जाता है। इसकी अधिकतम गति 120 मील प्रति घंटा (195 किलोमीटर प्रति घंटा) थी। हालांकि, जब तूफान फ्लोरिडा के सिएस्टा शहर से टकराया तो इसकी गति में कमी आई, गुरुवार की सुबह तक हवा की गति कम होकर 90 मील प्रति घंटे (150 किलोमीटर प्रति घंटे) हो गई है। फिलहाल मिल्टन तूफान लेवल 1 में बदल गया है।
बताया जा रहा है कि फ्लोरिडा के तट से टकराने से पहले ही तूफान की वजह से रिकॉर्ड बारिश हुई है। सेंट पीटर्सबर्ग में बुधवार को 16.6 इंच (422 मिमी) बारिश दर्ज की गई है। इस वजह से लाखों लोगों पर बाढ़ का खतरा भी मंडरा रहा है।
फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस के मुताबिक, तूफान ‘मिल्टन’ की वजह से करीब 19 से अधिक बवंडर भी आए हैं। कई जगह ऐसी भी हैं, जहां जानमाल के नुकसान की भी संभावना जताई गई है। यही नहीं, 20 लाख से अधिक घरों की बिजली भी गुल हो गई है।
इस तूफान के मद्देनजर फ्लोरिडा में लगभग नौ हजार नेशनल गार्ड्स की तैनाती की गई है। इसके अलावा 50 हजार विद्युत ग्रिड कर्मचारियों को भी तैनात किया गया है। तूफान के कारण करीब दो हजार से अधिक उड़ानें रद्द की गई हैं। इसके साथ ही पेट्रोल पंप बंद करने पड़े हैं और पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
ज्ञात हो कि फ्लोरिडा में कुछ दिन पहले ही हेलेन तूफान ने तबाही मचाई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हेलेन तूफान से अमेरिका के कई राज्य प्रभावित हुए थे और 200 से अधिक लोगों की मौत भी हुई थी।



