जिसके स्मृति में होती है श्री राम कथा ऐसे थे पंडित विश्वनाथ त्रिपाठी।

विनय मिश्र जिला संवाददाता
बरहज ,देवरिया। जिसके स्मृति में होती है 2002 से श्री राम कथा ऐसे पंडित विश्वनाथ त्रिपाठी जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भारत माता को गुलामी की जंजीर से मुक्त करने के
लिए समर्पित कर दिया जिन्होंने अपने धर्मपत्नी पुत्र और पुत्री का मोह छोड़ जेल को ही अपना घर मान लिया था। पंडित विश्वनाथ त्रिपाठी के बारे में जानने के लिए तीन चीज बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है व्यक्तित्व कार्य सामाजिक राजनीतिक एवं रचनात्मक कार्य त्रिपाठी जी के मन मस्तिष्क राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत था। , देश की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने अपना सब कुछ निराशा और कर दिया उनके जीवन का मात्रक उद्देश्य था भारत को आजाद करना आजाद भारत के रूप में देखना यही देखने के लिए उन्होंने सन 1922 से 1947 तक जब तक देश आजाद नहीं हो गया सदैव निहस्वार्थ भाव से इस पुनीत कार्य में लग रहे श्री विश्वनाथ त्रिपाठी का जन्म 1 जनवरी सन 1900 में नंदन वार्ड पश्चिम बरहज में एक संभ्रांत रन ब्राह्मण परिवार में हुआ था यह वह परिवार है जिन्होंने देश के प्रति प्रेम एवं सम्मान का भाव सदियों सदियों से रहा है। और आज भी यही सम्मान त्रिपाठी जी के वंशजों में भी विद्यमान है अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद संस्कृत के अध्ययन में जुड़ गए और बरहज आश्रम मैं स्थित संस्कृत महाविद्यालय में प्रवेश किया उसे समय महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पूर्वांचल के गांधी बाबा राघव दास आश्रम भारत के द्वितीय पीठाधीश्वर थे उनके संपर्क में आए, और बाबा राघव दास के निकट,के सहयोगी हुए, जिससे उनके घनिष्ठ लगाव हो गया, जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद बाबा राघव दास जी ने गुफा त्याग कर देश के लिए कुछ कर गुजरने हेतु बरहज की सड़कों पर उतर गए जिसका पूर्ण प्रभाव विश्वनाथ त्रिपाठी पर पड़ा सन 1921 में महात्मा गांधी जी गोरखपुर स्थित जार इस्लामिया कॉलेज में पधारे बाबा राघव दास संस्कृत महाविद्यालय के कुछ छात्रों को लेकर गोरखपुर पहुंचे उसे समय गोरखपुर के श्रेष्ठ नेताओं में विंध्यवासिनी प्रसाद श्रीवास्तव फिराक गोरखपुरी विंध्यवासिनी प्रसाद ने बाबा राघव दास का परिचय महात्मा गांधी से कराया। उसे समय एक दिव्य नवयुवक, सन्यासी और उनके विद्यार्थी मंडली को देखकर गांधी जी प्रसन्न हो गए गांधी जी ने बाबा राघव दास के विद्यार्थियों से पूछा तुम लोग देश के लिए क्या करोगे एक छोटा सा सामान्य कद काटी का बालक तत्काल बोलना हम चरखा चलाएंगे और सूत काटेंगे, गांधी जी आश्चर्यचकित होकर उसे विद्यार्थी की तरफ देखने लगे और फिर उसे लड़के से पूछा आगे क्या करोगे जिस पर पंडित विश्वनाथ त्रिपाठी ने कहा अपने भारत माता जो गुलामी की
बेढीयो में जकड़ी हुई है उन्हें मुक्त कराएंगे। यह सुनकर गांधी जी अत्यंत प्रसन्न हुए और बोले कि हमारी स्वतंत्रता अब दूर नहीं यह सामान्य कद काटी का बालक, कोई और नहीं बल्कि पंडित विश्वनाथ त्रिपाठी थे महात्मा गांधी से त्रिपाठी जी का साक्षात्कार अल्प आयु में ही हो गया था इस साक्षात्कार का प्रभाव त्रिपाठी जी पर भरपूर पड़ा जिनके नाम पर, आज परिवार के लोगों द्वारा विश्वनाथ त्रिपाठी शिक्षा संस्थान संचालित हो रहा है ।उनकी स्मृति में प्रतिवर्ष श्री राम कथा का भव्य आयोजन होता है इस वर्ष 16 से लेकर 20 अक्टूबर तक पांच दिवसीय कथा का आयोजन किया गया है।
छुप गए वो सारी, हस्ती छोड़कर,
बस तसबर का भरोसा रह गया।।



