हर भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत हैं पं.रामप्रसाद बिस्मिल – उपजिलाधिकारी* *पंडित जी के क्रांतिकारी कार्यों ने आजाद भारत का मार्ग किया तैयार – आंञ्जनेय दास*

बिस्मिल की विरासत आज भी जीवित - श्वेता जायसवाल* *परमहंसाश्रम बरहज परिसर में मनाया गया पं० रामप्रसाद बिस्मिल का बलिदान दिवस*

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विनय मिश्र, जिला संवाददाता।

 

बरहज, देवरिया। बरहज नगर स्थित अनंत पीठ परमहंस आश्रम बरहज में गुरुवार को क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के बलिदान दिवस पर गोष्ठी आयोजित की गई तथा उनके समाधि स्थल पर लोगों ने माथा टेककर उन्हें नमन किया।

मुख्य अतिथि बरहज के उप जिलाधिकारी अंगद यादव ने पंडित जी को श्रद्धासुमन अर्पित करने के पश्चात गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि रामप्रसाद बिस्मिल उन स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे जिन्होंने स्वतंत्र भारत के निर्माण के लिए ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी। वह 1918 के मैनपुरी षड्यंत्र और 1925 के काकोरी षड्यंत्र का हिस्सा थे। स्वतंत्रता सेनानी होने के अलावा वह एक कवि और लेखक भी थे, जिनकी उर्दू और हिंदी दोनों भाषाओं पर पकड़ थी। उन्होंने राम, अज्ञात और बिस्मिल उपनामों से कई कविताएँ लिखी हैं। साथ ही उनके द्वारा दिए गए कई ऐसे प्रेरणादायक विचार हैं, जो हर भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने सभी से इस अवसर को और अच्छी तरह से आयोजित किये जाने का आग्रह किया।

अनंत पीठ परमहंस आश्रम बरहज के पीठाधीश्वर आंञ्जनेय दास महाराज ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि पंडित रामप्रसाद बिस्मिल एक महान क्रांतिकारी, कवि, शायर, साहित्यकार और इतिहासकार थे। उनके क्रांतिकारी कार्यों ने आजाद भारत का मार्ग तैयार किया। उनकी कविताएं और गजलें भी उनकी देशभक्ति और क्रांतिकारी विचारों को दर्शाती हैं। बिस्मिल ने अपने जीवन में कई क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया। उन्होंने हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना की, जो एक क्रांतिकारी संगठन था। उन्होंने काकोरी कांड में भी भाग लिया, जो एक प्रमुख क्रांतिकारी घटना थी। 19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर जेल में उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा फांसी दे दी गई। क्या पूर्वांचल के गांधी के नाम से प्रसिद्ध बाबा राघवदास महाराज ने पंडित बिस्मिल की अंत्येष्टि कराने के पश्चात गोरखपुर सें अस्थि भस्म लाकर आश्रम बरहज में उनकी समाधि बनाई थी।

विशिष्ट अतिथि नगरपालिका बरहज की अध्यक्ष श्वेता जायसवाल ने कहा कि बिस्मिल की विरासत आज भी जीवित है। उन्हें एक महान क्रांतिकारी और देशभक्त के रूप में याद किया जाता है। उनकी कविताएं और लेखन आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं। गोष्टी को मंगलमणि त्रिपाठी, रमेश तिवारी ‘अंजान’, रामविलास प्रजापति, डॉ० किरन पाठक, सावित्री राय, गेंदालाल यादव, उमेश मणि ने संबोधित किया। कार्यक्रम की शुरुआत पंडित बिस्मिल के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। वेद स्तुति कृष्ण मुरारी तिवारी ने तथा मंगलाचरण परशुराम पांडेय एवं विनय कुमार मिश्र ने किया। बिस्मिल गीत प्रदीप कुमार शुक्ला ने प्रस्तुत किया। इस दौरान प्रमुख रूप से डॉ०अरविन्द पाण्डेय, दीनानाथ यादव, ओमप्रकाश दुबे, रविंद्र यादव, अशोक शुक्ला, सुनील पांडेय, मोतीलाल गुप्ता, सीमा आर्य, सुभाष यादव, रतन वर्मा, महेश यादव, रामचंद्र यादव, मनोज गुप्ता, कुमारी संध्या, आकांक्षा सिंह आदि मौजूद रहे।

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