जनसुनवाई में पहुंचे मृतक युवक के परिजन, न्याय की लगाई गुहार,गवाहों को मिल रही धमकियों पर अब तक नहीं हुई कार्रवाई
The family of the deceased youth reached the public hearing, pleaded for justice, no action has been taken yet on the threats being received by the witnesses

जबलपुर। सिविक सेंटर में 27 नवंबर 2023 को हुए 20 वर्षीय मो. मुजाहिद हत्याकांड के मामले में न्याय की गुहार लेकर मृतक युवक के माता-पिता एक बार फिर पुलिस अधीक्षक (एसपी) की जनसुनवाई में पहुंचे। इससे पहले भी वे पिछले हफ्ते जनसुनवाई में अपनी पीड़ा व्यक्त कर चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें न्याय की कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है।
मृतक युवक के पिता का आरोप है कि हत्या के चारों आरोपी—सुजल, टीनू, अमन और आदित्य—जेल में बंद हैं, लेकिन उनके परिजन लगातार गवाहों को धमका रहे हैं। गवाहों को कोर्ट में बयान देने से रोकने के लिए डराया-धमकाया जा रहा है, यहां तक कि उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जा रही है। मोहम्मद वजीर का यह भी कहना है कि उन्हें भी लगातार धमकियां दी जा रही हैं कि अगर वे केस वापस नहीं लेते तो उनकी भी हत्या कर दी जाएगी।
परिजन बोले—हर हफ्ते गुहार लगा रहे, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं
जनसुनवाई में पहुंचे मृतक युवक के माता-पिता ने रोते हुए एसपी से गुहार लगाई कि यदि जल्द ही आरोपियों के परिजनों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो गवाह डरकर पीछे हट सकते हैं और न्याय की उम्मीद खत्म हो सकती है। उन्होंने कहा, “हम हर हफ्ते न्याय की आस में यहां आते हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गवाहों को खुली धमकियां दी जा रही हैं, हम खुद असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।”
परिजनों का कहना है कि आरोपी पक्ष के लोग न सिर्फ गवाहों को धमका रहे हैं, बल्कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की भी साजिश कर रहे हैं। वे लगातार पुलिस प्रशासन से सुरक्षा और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि न्याय की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
एडिशनल एसपी प्रदीप कुमार शिंदे ने परिजनों को आश्वासन दिया कि पुलिस मामले को गंभीरता से ले रही है और गवाहों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, परिजन इस बात से संतुष्ट नहीं दिखे। उनका कहना है कि यदि पुलिस ने पहले ही कड़ी कार्रवाई की होती, तो आरोपी पक्ष के लोग इस तरह खुलेआम धमकियां देने की हिम्मत नहीं करते।
अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है या फिर मृतक के परिजनों को हर हफ्ते यूं ही न्याय की गुहार लगाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
जबलपुर से वाजिद खान की रिपोर्ट



