Azamgarh News: चांदपुर मानपुर में जीवित है सदियों पुरानी होली की परंपरा: फाग, होरी और चौताल से गूंज उठा गांव

आजमगढ़ बलरामपुर से बबलू राय
आजमगढ़ जनपद के बिलरियागंज थाना क्षेत्र अंतर्गत चांदपुर मानपुर ग्राम सभा में होली का पर्व आज भी पुरानी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के साथ जीवंत रूप में मनाया जाता है। यहां गांव के लोग एकजुटता और भाईचारे की अनूठी मिसाल पेश करते हुए सामूहिक रूप से ढोल-मंजीरा के साथ पूरे गांव में फाग, चैता, होरी, चौताल और धमार गाते हुए हर घर के दरवाजे पर पहुंचते हैं।
बरसों से चली आ रही इस परंपरा में गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। सुबह लगभग 12:00 बजे शुरू होने वाला यह सांस्कृतिक कारवां पूरे गांव में घूमता है और रात करीब 9:00 बजे शिव मंदिर चांदपुर सरैया बाजार के प्रांगण में संपन्न होता है। इस दौरान जहां-जहां टोली पहुंचती है, वहां घर के लोग पूरे आदर और उत्साह के साथ उनका स्वागत करते हैं।
हर दरवाजे पर पारंपरिक आतिथ्य की झलक देखने को मिलती है। ग्रामीण अपनी सामर्थ्य के अनुसार गुजिया, पेड़ा, बर्फी, काला जाम, ड्राई फ्रूट की मिठाइयां, टिकिया, पकौड़ी, छोला, समोसा आदि व्यंजनों से सत्कार करते हैं। उपस्थित लोगों के माथे पर अबीर-गुलाल लगाकर, इत्र-परफ्यूम छिड़ककर और गले मिलकर शुभकामनाएं दी जाती हैं। पूरा वातावरण प्रेम, सद्भाव और रंगों की खुशबू से सराबोर हो उठता है।
कार्यक्रम के दौरान गांव के ही कौशल राय,अशोक कुमार राय, अभय राय, अजय राय, विजय राय, नरेंद्र राय, वीरेंद्र राय, राम जी राय, हरिश्चंद्र पांडेय समेत अन्य ग्रामीणों के मुखारविंद से पारंपरिक और भक्तिमय होली गीत गूंजते हैं। “सुतल सैंया के जगावे हो रामा कोयल बड़ी पापी”, “खेले मसाने में होली दिगंबर” और “रघुवर संग खेलत जनक दुलारी” जैसे गीतों को सुनकर उपस्थित लोग भावविभोर हो जाते हैं। ढोल-मंजीरा की थाप पर गूंजते इन गीतों से पूरा गांव भक्तिरस और उल्लास में डूब जाता है। समापन के समय शिव मंदिर प्रांगण में सभी ग्रामीण एकत्र होकर शिव, पार्वती तथा राधा-कृष्ण के जयकारों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं। इसके बाद सभी एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए अपने-अपने घरों को लौट जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आगे भी इसी तरह चलती रहेगी। बदलते समय के साथ जहां कई जगहों पर पारंपरिक होली की स्वर लहरियां धीमी पड़ गई हैं, वहीं चांदपुर मानपुर गांव आज भी अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोए हुए है। यहां की होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, एकता और सामूहिक संस्कृति का जीवंत उत्सव है।



