Varanasi news:शहर से मीट और मछली बाजार हटाने के प्रस्ताव पर यूथ विंग ने जताई नाराजगी
Varanasi News: Youth wing expresses displeasure over proposal to remove meat and fish markets from the city

वाराणसी नगर निगम द्वारा शहर के भीतर संचालित मीट, मांस, मछली और मुर्गा कारोबार से जुड़े बाजारों को बाहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित किए जाने की प्रस्तावित योजना पर ऑल इंडिया जमीयतुल कुरैश (यूथ विंग) के प्रदेश उपाध्यक्ष हाजी मोहम्मद तौफीक कुरैशी ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी प्रशासनिक निर्णय को लागू करने से पहले उससे प्रभावित लोगों के सामाजिक और आर्थिक पक्षों पर गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि नगर निगम द्वारा रामनगर, सुजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर तथा शिवपुर जैसे क्षेत्रों में इन बाजारों को स्थानांतरित करने की दिशा में विचार किया जा रहा है। यदि इस प्रक्रिया को बिना व्यापारियों और संबंधित वर्गों से संवाद किए लागू किया गया तो इसका सीधा प्रभाव हजारों लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है।
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हाजी तौफीक कुरैशी ने कहा कि यह मामला केवल दुकानों के स्थान परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ अनेक परिवारों की आर्थिक स्थिति जुड़ी हुई है। शहर में संचालित मीट, मांस, मछली और मुर्गा व्यापार से दुकानदारों के अलावा कसाई, श्रमिक, परिवहन कर्मचारी, सफाईकर्मी, कोल्ड स्टोरेज कर्मचारी, थोक कारोबारी और अन्य सहायक व्यवसायों से जुड़े लोग भी रोजगार प्राप्त करते हैं। ऐसे में किसी भी निर्णय के दूरगामी प्रभावों को ध्यान में रखना जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि वर्षों से यह व्यापार शहर की खाद्य आपूर्ति व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। व्यापारियों ने निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत अपने प्रतिष्ठान स्थापित किए हैं तथा नगर निगम के प्रति अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों का भी निर्वहन किया है। ऐसे में संबंधित पक्षों की भागीदारी के बिना एकतरफा निर्णय लेना उचित नहीं माना जा सकता।
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उन्होंने मांग की कि यदि बाजारों को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया जाता है तो प्रस्तावित स्थानों पर पहले आवश्यक मूलभूत सुविधाओं से युक्त आधुनिक बाजार विकसित किए जाएं। वहां स्वच्छ पेयजल, विद्युत व्यवस्था, कोल्ड स्टोरेज, जल निकासी, कचरा प्रबंधन, पार्किंग, सुरक्षा, स्वास्थ्य जांच केंद्र, अग्निशमन व्यवस्था और ग्राहकों के लिए सुगम पहुंच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
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उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को बाजारों के निर्माण की समयसीमा, दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया, वर्तमान व्यापारियों को प्राथमिकता और स्थानांतरण के दौरान संभावित आर्थिक प्रभावों को लेकर स्पष्ट नीति सामने लानी चाहिए। जब तक इन विषयों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए जाते, तब तक किसी भी प्रकार की स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू नहीं की जानी चाहिए।हाजी तौफीक कुरैशी ने कहा कि यदि बाजार अत्यधिक दूर स्थापित किए गए तो ग्राहकों की पहुंच प्रभावित होगी, जिसका असर सीधे व्यापार और रोजगार पर पड़ेगा। छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों के लिए यह स्थिति आर्थिक संकट का कारण बन सकती है। इसलिए स्थान परिवर्तन से पहले व्यवहारिक और आर्थिक अध्ययन भी कराया जाना आवश्यक है।उन्होंने नगर निगम की बैठक में उठाए गए व्यापारियों से जुड़े मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि पहले से ही महंगाई, व्यवसायिक चुनौतियां और घटती क्रय शक्ति के कारण व्यापारी वर्ग दबाव में है। ऐसे समय में बिना समुचित व्यवस्था के लिए गए निर्णय समस्याओं को और बढ़ा सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि प्रशासन को विकास और स्वच्छता के साथ-साथ रोजगार और आजीविका से जुड़े अधिकारों का भी संतुलन बनाए रखना चाहिए। विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब वह सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़े।
ऑल इंडिया जमीयतुल कुरैश ने मांग की है कि अंतिम निर्णय से पहले व्यापारियों, समाज के प्रतिनिधियों, श्रमिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक आयोजित कर सभी पक्षों की राय ली जाए।संगठन ने यह भी कहा कि जब तक नई जगहों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार नहीं हो जातीं, तब तक किसी भी प्रकार की दुकान हटाने, सील करने अथवा व्यापार बंद कराने की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
अंत में हाजी मोहम्मद तौफीक कुरैशी ने कहा कि समाज कानून और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखता है तथा शहर के विकास और स्वच्छता के प्रयासों का समर्थन करता है, लेकिन विकास की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिसमें किसी भी वर्ग की आजीविका प्रभावित न हो और सभी के हित सुरक्षित रहें।



