Azamgarh news :पूर्व में हुई बैठक व मा0 मुख्यमंत्री के वीसी में दिये गये निर्देश उपरान्त, डीएम के स्थलीय निरीक्षण में कांवड़ यात्रा मार्ग पर गड्ढ़े व जल भराव पाये जाने पर संबंधित जेई पर दर्ज हुई प्राथमिकी
पूर्व में हुई बैठक व मा0 मुख्यमंत्री के वीसी में दिये गये निर्देश उपरान्त, डीएम के स्थलीय निरीक्षण में कांवड़ यात्रा मार्ग पर गड्ढ़े व जल भराव पाये जाने पर संबंधित जेई पर दर्ज हुई प्राथमिकी

कांवड़ यात्रा मार्ग को सुगम एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से की गयी कार्यवाही
आजमगढ़ ब्यूरो चीफ राकेश श्रीवास्तव
श्रावण मास एवं कांवड़ यात्रा को जनपद में सकुशल, शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढ़ंग से सम्पन्न कराने के दृष्टिगत जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार द्वारा 22 जुलाई को हरिऔध कला केन्द्र एवं 24 जुलाई को मा0 मुख्यमंत्री द्वारा वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये कांवड़ यात्रा मार्ग को सुगम एवं सुरक्षित बनाने के साथ ही स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश, स्वास्थ्य एवं यातायात की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये गये थे।
श्रावण मास एवं कांवड़ यात्रा के तैयारियों की स्थलीय निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने रविवार 26 जुलाई को जनपद के प्रसिद्ध शिवालय बाबा भंवरनाथ मंदिर परिसर का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण में भंवरनाथ से कम्हेनपुर सम्पर्क मार्ग, जिस पर कांवरियों द्वारा जलाभिषेक हेतु आना-जाना होता है। मार्ग के प्रारम्भ से 400 मीटर लम्बाई में गड्ढ़े, जल भराव आदि पाये जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए तत्काल अधिशाासी अभियन्ता लोक निर्माण विभाग को संबंधित अवर अभियन्ता के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया।
उक्त निर्देश के अनुपालन मंे सहायक अभियन्ता निर्माण खण्ड-2 लोनिवि0 द्वारा उपर्युक्त मार्ग पर गड्ढ़े भराई का कार्य नही कराये जाने के जिम्मेदार रतनदीप अवर अभियन्ता निर्माण खण्ड-2 लोनिवि0 के विरूद्ध थाना कन्धरापुर में प्राथमिकी ( बीएनएस की धारा 223 व 198 )दर्ज करायी गयी, जिस पर विधिक कार्यवाही की जा रही है।
अवर अभियंता पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 और 198 लगाई गई है। जिसमे धारा 223 बीएनएस— लोक सेवक द्वारा विधिवत प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा से संबंधित है। यदि किसी कानूनी रूप से सक्षम लोक सेवक द्वारा कोई वैध आदेश जारी किया गया है और व्यक्ति को उस आदेश की जानकारी होने के बावजूद वह उसका पालन नहीं करता, तो धारा 223 लागू हो सकती है। यदि अवज्ञा से बाधा, परेशानी, चोट या ऐसी स्थिति का जोखिम उत्पन्न होता है—तो 6 माह तक का साधारण कारावास, या ₹2,500 तक जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। यदि अवज्ञा से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा पैदा होता है या दंगा/उपद्रव होने की स्थिति बनती है—तो 1 वर्ष तक का कारावास, या ₹5,000 तक जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। इसमें यह आवश्यक नहीं कि आरोपी का नुकसान पहुंचाने का इरादा ही हो; आदेश की जानकारी के बावजूद अवज्ञा और उससे नुकसान/नुकसान की संभावना पर्याप्त हो सकती है।
धारा 198 बीएनएस— लोक सेवक द्वारा कानून की अवज्ञा कर किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाना।
यह धारा लोक सेवक (सरकारी कर्मचारी/अधिकारी) पर लागू होती है। यदि कोई लोक सेवक जानबूझकर उस कानून के निर्देश का उल्लंघन करता है, जिसके अनुसार उसे अपने पद पर कार्य करना चाहिए, और उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाना है या उसे पता है कि इससे किसी व्यक्ति को नुकसान होने की संभावना है, तो यह अपराध है।
संबंधित जेई द्वारा उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना की गई है तथा उनके लापरवाही से भविष्य में किसी श्रद्धालुगण के साथ दुर्घटना घट सकती है। श्रद्धालुओं के सुगमता,सुरक्षा व हितार्थ प्रशासन द्वारा यह कार्रवाई की गई है।



