Azamgarh news;पीएमएस एसोसिएशन आजमगढ़ के सचिव पद के लिए डॉ. रोहित मिश्रा ने किया नामांकन, चिकित्सकों की समस्याओं के समाधान का रखा विस्तृत विजन
Azamgarh news: Dr. Rohit Mishra has filed his nomination for the post of Secretary of the PMS Association, Azamgarh. He has presented a detailed vision for solving the problems of doctors.
पीएमएस एसोसिएशन, आजमगढ़ शाखा के सचिव पद के लिए डॉ. रोहित मिश्रा ने नामांकन दाखिल किया। उन्होंने चिकित्सकों के हितों, सुरक्षा, बेहतर आवास, पारदर्शी प्रशासन और संगठन की मजबूती को अपनी प्राथमिकता बताते हुए सभी सदस्यों के साथ मिलकर कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।डॉ. मिश्रा ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि चिकित्सकों की समस्याओं का प्रभावी समाधान कर संगठन को अधिक सक्रिय और मजबूत बनाना है। उनके सकारात्मक विजन और चिकित्सक हितों के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की जा रही है।
आजमगढ़। पीएमएस (प्रांतीय चिकित्सा सेवा) एसोसिएशन, आजमगढ़ शाखा के आगामी चुनाव को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुहम्मदपुर के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रोहित मिश्रा ने सचिव पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने संगठन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और चिकित्सक हितैषी बनाने का संकल्प व्यक्त किया तथा कहा कि यदि उन्हें संगठन की जिम्मेदारी मिलती है तो वे चिकित्सकों की लंबे समय से चली आ रही विभिन्न प्रशासनिक, आवासीय और सुरक्षा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्य करेंगे।डॉ. रोहित मिश्रा ने कहा कि सरकारी चिकित्सक दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं। विषम परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और लगातार बढ़ते कार्यभार के बावजूद चिकित्सक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करते हैं। इसके बावजूद उन्हें कई बार बुनियादी सुविधाओं के अभाव, प्रशासनिक विलंब तथा अन्य व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उनका मानना है कि यदि संगठन मजबूत और सक्रिय भूमिका निभाए तो इन समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव है।
उन्होंने अपने दृष्टिकोण में सबसे पहले चिकित्सकों के आवास की समस्या को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि अनेक स्थानों पर सरकारी आवास जर्जर स्थिति में हैं, जिससे चिकित्सकों और उनके परिवारों को असुविधा होती है। उन्होंने मंडलीय जिला चिकित्सालय तथा जिला महिला चिकित्सालय, आजमगढ़ के आवासों की स्थिति में सुधार कराने की बात कही। साथ ही उन्होंने पुरानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इमारतों के जीर्णोद्धार की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि चिकित्सकों को सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक आवास उपलब्ध हो सकें।डॉ. मिश्रा ने कहा कि बेहतर आवास केवल सुविधा का विषय नहीं बल्कि चिकित्सकों की कार्यक्षमता और मनोबल से भी जुड़ा हुआ है। उनका मानना है कि जब चिकित्सक बेहतर वातावरण में रहेंगे तो वे अधिक ऊर्जा और समर्पण के साथ मरीजों की सेवा कर सकेंगे।
उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार कई बार अवकाश, वेतन संबंधी भुगतान, चिकित्सा प्रतिपूर्ति अथवा अन्य प्रशासनिक कार्यों में अनावश्यक विलंब होता है, जिससे चिकित्सकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें अवसर मिलता है तो वे सीएमओ कार्यालय में विभिन्न आवश्यक मामलों के निस्तारण के लिए समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित कराने का प्रयास करेंगे।उनके प्रस्तावित एजेंडे में आकस्मिक एवं चिकित्सा अवकाश की स्वीकृति, अर्जित अवकाश (ईएल), महंगाई भत्ता और वेतन बकाया, स्थानांतरण भत्ता तथा चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों के शीघ्र निस्तारण जैसे विषय शामिल हैं। उनका कहना है कि प्रशासनिक प्रक्रिया जितनी सरल और पारदर्शी होगी, चिकित्सक उतना ही अधिक समय मरीजों की सेवा को दे सकेंगे।डॉ. रोहित मिश्रा ने चिकित्सकों की सुरक्षा को भी अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बताया। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के साथ होने वाली अप्रिय घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई तथा चिकित्सा सुरक्षा कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सा लापरवाही के झूठे मामलों में चिकित्सकों को उचित कानूनी और संगठनात्मक सहयोग मिलना चाहिए, ताकि वे बिना किसी अनावश्यक भय के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।उन्होंने संगठनात्मक मजबूती पर विशेष बल देते हुए कहा कि जिला और प्रदेश स्तर की कार्यकारिणी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होना चाहिए। उनके अनुसार यदि दोनों स्तरों पर नियमित संवाद और सहयोग की व्यवस्था हो तो चिकित्सकों की समस्याओं का समाधान अधिक तेजी से किया जा सकता है।प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने वर्ष 2020 की नियमावली को लेकर भी अपनी बात रखी और कहा कि संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से शासन स्तर पर इस विषय को उठाने का प्रयास करेगा। उनका कहना है कि चिकित्सकों से जुड़े नीतिगत विषयों पर संगठन को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और आवश्यक होने पर संवाद तथा वैधानिक माध्यमों से अपनी बात प्रभावी ढंग से रखनी चाहिए।डॉ. मिश्रा ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना नहीं बल्कि संगठन में ऐसी कार्य संस्कृति विकसित करना है जिसमें प्रत्येक सदस्य की बात सुनी जाए और समस्याओं का समयबद्ध समाधान खोजा जाए। उन्होंने पारदर्शिता, जवाबदेही और टीमवर्क को संगठन की सफलता का आधार बताया।उन्होंने कहा कि सरकारी चिकित्सक समाज के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक हैं। महामारी,आपदा अथवा किसी भी स्वास्थ्य संकट के समय चिकित्सकों ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी निष्ठा से किया है। इसलिए यह आवश्यक है कि उन्हें भी सम्मानजनक कार्य वातावरण, सुरक्षित माहौल और समय पर प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध हों।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि संगठन केवल चुनाव तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे कार्यकाल के दौरान चिकित्सकों की समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय रूप से कार्य करता रहे। उन्होंने सुझाव दिया कि समय-समय पर सदस्यों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि प्रत्येक चिकित्सक अपनी समस्या सीधे संगठन के समक्ष रख सके।उन्होंने युवा चिकित्सकों और वरिष्ठ चिकित्सकों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनका मानना है कि वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुभव और युवा चिकित्सकों की ऊर्जा का समन्वय संगठन को नई दिशा दे सकता है।
डॉ. मिश्रा ने यह भी कहा कि संगठन को डिजिटल माध्यमों का अधिक उपयोग करना चाहिए, जिससे आवेदन, शिकायत और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को अधिक सरल और प्रभावी बनाया जा सके। उनका कहना है कि तकनीक के बेहतर उपयोग से समय की बचत होगी और अनावश्यक प्रशासनिक जटिलताएं भी कम होंगी।उन्होंने अपने संदेश में चिकित्सकों से संगठन की एकजुटता बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि एक मजबूत संगठन ही अपने सदस्यों के हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा कर सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी चिकित्सक मिलकर संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाएंगे। अंत में डॉ. रोहित मिश्रा ने सभी चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे निरंतर उनके सुझावों और मार्गदर्शन का स्वागत करेंगे। उन्होंने कहा कि संगठन की सफलता सामूहिक सहभागिता और पारस्परिक विश्वास पर आधारित होती है तथा प्रत्येक सदस्य की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है।उल्लेखनीय है कि पीएमएस एसोसिएशन के चुनाव को लेकर चिकित्सकों के बीच व्यापक चर्चा का माहौल है। विभिन्न प्रत्याशी अपने-अपने दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं के साथ सदस्यों के बीच संवाद स्थापित कर रहे हैं। ऐसे में डॉ. रोहित मिश्रा द्वारा प्रस्तुत एजेंडा भी संगठनात्मक सुधार, प्रशासनिक दक्षता, चिकित्सक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों को केंद्र में रखता है। आगामी चुनाव में संगठन के सदस्य इन विभिन्न प्रस्तावों और दृष्टिकोणों के आधार पर अपना निर्णय करेंगे।



