ऑनलाइन पत्रकारिता प्रशिक्षण में मीडिया कानून और नैतिकता पर विशेष कक्षा
पत्रकारिता की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी : संजय पांडेय

आरोप और सिद्ध तथ्य में अंतर समझना पत्रकार के लिए जरूरी : संजय पांडेय
Jharkhand News: रांची। पत्रकारिता केवल समाचार संकलन और प्रकाशन का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है। एक पेशेवर पत्रकार को समाचार प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की सत्यता, स्रोत की विश्वसनीयता, जनहित, नैतिक मानकों और संभावित कानूनी प्रभावों को समझना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से आयोजित ऑनलाइन पत्रकारिता प्रशिक्षण कक्षा में वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रेस लॉ एक्सपर्ट संजय कुमार पांडेय ने विद्यार्थियों को पत्रकारिता और कानून के आपसी संबंध की विस्तृत एवं व्यावहारिक जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान श्री पांडेय ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता का अर्थ जिम्मेदारी से मुक्ति नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि प्रेस की स्वतंत्रता के साथ तथ्यात्मकता, निष्पक्षता, जवाबदेही और कानून का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
ऑनलाइन कक्षा में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 19(2) के तहत लगाए जा सकने वाले उचित प्रतिबंधों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि पत्रकारिता में स्वतंत्रता, जिम्मेदारी, कानून और नैतिकता के बीच संतुलन आवश्यक है।
मानहानि और आरोपों की रिपोर्टिंग पर विशेष जोर
प्रशिक्षण में मानहानि को महत्वपूर्ण विषय के रूप में समझाया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी व्यक्ति के विरुद्ध आरोप प्रकाशित करते समय आरोप और सिद्ध तथ्य के बीच स्पष्ट अंतर रखना चाहिए।
श्री पांडेय ने पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण सूत्र बताते हुए कहा कि आरोप प्रमाण नहीं है और आरोपी दोषी सिद्ध व्यक्ति नहीं है।
उन्होंने कहा कि किसी आरोप को समाचार में तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उसके स्रोत और संदर्भ को स्पष्ट करना चाहिए। संबंधित व्यक्ति या संस्था का पक्ष लेना, उपलब्ध दस्तावेजों की जांच करना और शीर्षक को समाचार के वास्तविक तथ्यों के अनुरूप रखना आवश्यक है। स्रोत बताना और न्यायालय संबंधी समाचारों में सावधानी जरूरी
ऑनलाइन प्रशिक्षण में समाचार के स्रोत को स्पष्ट करने की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विद्यार्थियों को बताया गया कि समाचार में यह स्पष्ट होना चाहिए कि कोई महत्वपूर्ण जानकारी किस स्रोत से प्राप्त हुई है।
इसी तरह न्यायालय की अवमानना और न्यायालय संबंधी समाचारों के संदर्भ में विद्यार्थियों को न्यायिक प्रक्रिया की सही रिपोर्टिंग, न्यायालय के आदेश को सही संदर्भ में समझने तथा पत्रकार की व्यक्तिगत राय और न्यायालय के निष्कर्ष को अलग रखने की आवश्यकता बताई गई।
निजता, बच्चों और कॉपीराइट के प्रति जागरूकता प्रशिक्षण में निजता के विषय पर चर्चा करते हुए कहा गया कि पत्रकार के पास किसी व्यक्ति की जानकारी उपलब्ध होना मात्र उसे प्रकाशित करने का पर्याप्त आधार नहीं है। पत्रकार को यह विचार करना चाहिए कि सूचना वास्तव में जनहित में है या केवल जन जिज्ञासा का विषय है। बच्चों और संवेदनशील परिस्थितियों में मौजूद लोगों की रिपोर्टिंग में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई। उनकी पहचान, फोटो, पता, स्कूल और परिवार से संबंधित संवेदनशील जानकारी प्रकाशित करने से पहले कानूनी एवं नैतिक पहलुओं पर विचार करना जरूरी बताया गया। वहीं कॉपीराइट के अंतर्गत फोटो, वीडियो, समाचार सामग्री, चित्र, ऑडियो और डिजाइन के इस्तेमाल में अधिकार एवं अनुमति की स्थिति की जांच करने पर जोर दिया गया।
गुप्त स्रोत की जानकारी का सत्यापन भी जरूरी
प्रशिक्षण के दौरान स्रोत की सुरक्षा पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी स्रोत की पहचान गोपनीय रखना और उसकी सूचना को बिना सत्यापन के प्रकाशित करना दो अलग बातें हैं। संजय पांडेय ने समझाया कि गोपनीय स्रोत का अर्थ अप्रमाणित स्रोत नहीं है। ऐसे स्रोत से प्राप्त महत्वपूर्ण जानकारी की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जानी चाहिए।
फर्जी खबरों से मुकाबले के लिए सत्यापन जरूरी:
ल डिजिटल युग में फर्जी खबरें, गलत सूचनाएं और जानबूझकर फैलाई जाने वाली भ्रामक सूचनाएं पत्रकारिता के सामने बड़ी चुनौती हैं। प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को वायरल दावे की जांच के लिए छह बिंदुओं पर आधारित सत्यापन प्रक्रिया बताई गई।इसमें स्रोत, प्रमाण, तारीख, स्थान, संदर्भ और स्वतंत्र पुष्टि को महत्वपूर्ण माना गया। उन्होंने कहा कि किसी वायरल सूचना को प्रकाशित करने से पहले पत्रकार को यह देखना चाहिए कि मूल स्रोत कौन है, उसके पास क्या प्रमाण हैं, घटना कब और कहां की है, उसका पूरा संदर्भ क्या है और क्या स्वतंत्र स्रोतों से उसकी पुष्टि होती है। समाचार का शीर्षक भी तथ्यों के अनुरूप होप्रशिक्षण में शीर्षक लेखन को भी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी से जोड़ा गया। विद्यार्थियों को समझाया गया कि कई बार पूरी खबर तथ्यात्मक होने के बावजूद भ्रामक शीर्षक पाठक को गलत निष्कर्ष तक पहुंचा सकता है। इसलिए समाचार का शीर्षक भी समाचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसका भी तथ्य सत्यापन किया जाना चाहिए।व्यावहारिक पत्रकारिता पर जोर: ऑनलाइन प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक न रखते हुए विद्यार्थियों को व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। एक उदाहरण के माध्यम से सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप वाली स्थिति विद्यार्थियों के सामने रखी गई, जिसमें शिकायत पत्र, अधिकारी का बयान, सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित सामग्री और कुछ दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। विद्यार्थियों को समझाया गया कि आरोप को सीधे प्रकाशित करने के बजाय पहले दस्तावेजों की जांच करें, संबंधित विभाग या व्यक्ति का पक्ष लें, स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि करें और आरोप तथा सिद्ध तथ्य के बीच स्पष्ट अंतर रखें।प्रशिक्षण के अंत में विद्यार्थियों को प्रेस की स्वतंत्रता, मानहानि, निजता, कॉपीराइट, न्यायालय की अवमानना, सूचना का अधिकार, डिजिटल मीडिया और मीडिया नैतिकता जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख तैयार करने का व्यावहारिक कार्य भी दिया गया। कानून पत्रकार को डराने के लिए नहीं, रास्ता दिखाने के लिए हैसंजय पांडेय ने कहा कि “कानून पत्रकार को डराने के लिए नहीं, जिम्मेदार पत्रकारिता का रास्ता दिखाने के लिए समझना चाहिए।” उन्होंने कहा कि रिपोर्टिंग, संपादन, मीडिया कानून, पत्रकारिता की नैतिकता और डिजिटल कौशल में मजबूत आधार बनाने वाला विद्यार्थी बदलते मीडिया उद्योग में अधिक जिम्मेदारी और आत्मविश्वास के साथ कार्य कर सकता है।ऑनलाइन कक्षा में विद्यार्थियों को पत्रकारिता के दस स्वर्णिम नियम भी बताए गए। इनमें समाचार प्रकाशित करने से पहले तथ्यों का सत्यापन, महत्वपूर्ण आरोपों के स्रोत का उल्लेख, प्रभावित पक्ष को जवाब देने का अवसर, आरोप और दोषसिद्धि में अंतर, निजता और गरिमा का सम्मान, सनसनीखेज शीर्षकों से बचाव, समाचार और विज्ञापन में स्पष्ट अंतर, स्रोतों की जिम्मेदारी से सुरक्षा, गलतियों को पारदर्शिता के साथ सुधारना तथा जनहित को पत्रकारिता का मार्गदर्शक बनाना शामिल है।प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि एक जिम्मेदार पत्रकार केवल खबर लिखने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह तथ्य, कानून, नैतिकता और जनहित के बीच संतुलन स्थापित करने वाला लोकतांत्रिक प्रहरी भी होता है।



