UNGA में ईरान की हुंकार: पेजेशकियन के भाषण के बीच अमेरिकी प्रतिनिधि का वॉकआउट, बोले- दबाव के आगे नहीं झुकेगा ईरान

Iran's roar in Unga: US representative walks out during Pezeshkian's speech, says Iran will not bow to pressure

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर बुधवार को ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आया। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अपने संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों का कड़ा जवाब देते हुए कहा कि ईरान दबाव और धमकी के सामने झुकने वाला नहीं है। उनके भाषण के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की सीटों से एक प्रतिनिधि उठकर हॉल से बाहर चला गया।पेजेशकियन ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से ईरान को आतंकवाद का आरोपी बताए जाने पर पलटवार करते हुए कहा कि उनके देश ने स्वयं आतंकवाद और हमलों का सामना किया है। उन्होंने अपने भाषण के दौरान मृत बच्चों और ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीरें भी दिखाईं और अमेरिका तथा इजरायल पर ईरानी नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के आरोप लगाए।

‘ईरान सिर नहीं झुकाएगा’

पेजेशकियन का संदेश स्पष्ट था—ईरान सैन्य और आर्थिक दबाव के आगे आत्मसमर्पण नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि धमकी और दबाव ईरानी जनता के प्रतिरोध को और मजबूत करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान बातचीत और कूटनीति का दरवाजा बंद नहीं कर रहा है।ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश अपनी स्वतंत्रता और सुरक्षा की रक्षा करना चाहता है और क्षेत्रीय सुरक्षा किसी एक देश के प्रभुत्व से नहीं, बल्कि सहयोग और बातचीत से हासिल की जा सकती है।

अमेरिकी वॉकआउट ने बढ़ाया संदेश का असर

पेजेशकियन के संबोधन के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधि के हॉल से बाहर निकलने की घटना ने भाषण को और सुर्खियों में ला दिया। रिपोर्टों के मुताबिक इजरायली प्रतिनिधिमंडल भी उनके संबोधन के दौरान मौजूद नहीं था।ईरान के नजरिए से देखें तो यह घटनाक्रम तेहरान को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर अपनी बात सीधे दुनिया के सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर देता है। पेजेशकियन ने युद्ध और दबाव के बीच भी अपने देश की संप्रभुता तथा प्रतिरोध की भावना को प्रमुखता से सामने रखा।

ताकत के साथ कूटनीति का संदेश

ईरानी राष्ट्रपति के भाषण की एक अहम बात यह रही कि तीखे शब्दों के बावजूद उन्होंने बातचीत का रास्ता खुला रखा। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान कमजोरी के कारण नहीं, बल्कि अपनी स्थिति पर विश्वास रखते हुए दुनिया के साथ संवाद और सहयोग चाहता है।यही पहलू पेजेशकियन के संबोधन को केवल अमेरिकी नीतियों के विरोध तक सीमित नहीं रखता। उनके संदेश में ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और कूटनीतिक संवाद—तीनों को साथ लेकर चलने की बात सामने आई।

दुनिया के सामने ईरान का दो टूक संदेश

संयुक्त राष्ट्र के मंच से पेजेशकियन ने जिस दृढ़ता के साथ ईरान का पक्ष रखा, उससे यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि तेहरान युद्ध और दबाव के बीच भी अपनी राजनीतिक स्थिति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। उनके भाषण का केंद्रीय संदेश था—धमकियों के सामने आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि अपनी संप्रभुता की रक्षा और बातचीत के लिए दरवाजा खुला रखना।

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