Azamgarh News:प्रेशर हॉर्न पर कानून बेअसर आजमगढ़ में कानून का हॉर्न बंद, सड़कों पर प्रेशर हॉर्न चालू!

आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय
प्रेशर हॉर्न पर कानून बेअसर
आजमगढ़ में कानून का हॉर्न बंद, सड़कों पर प्रेशर हॉर्न चालू!
निजी से लेकर सरकारी बड़े वाहनों में धड़ल्ले से तेज आवाज वाले हॉर्न के इस्तेमाल का आरोप, आरटीओ और ट्रैफिक विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल
आजमगढ़ जनपद की सड़कों पर यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आ रहा है। बड़े निजी वाहनों से लेकर सरकारी वाहनों तक में तेज आवाज वाले प्रेशर हॉर्न के इस्तेमाल की शिकायतें मिल रही हैं। ट्रक, बस और अन्य भारी वाहनों में लगे इन हॉर्न की तेज आवाज से राहगीरों, बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि प्रतिबंधित प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल करने वाले वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से वाहन मालिकों के हौसले बुलंद हैं।
अचानक बजता है प्रेशर हॉर्न, दहशत में आ जाते हैं राहगीर
सड़क पर चलते समय पीछे से अचानक तेज आवाज में प्रेशर हॉर्न बजने से दोपहिया वाहन चालक कई बार घबरा जाते हैं। इससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। वहीं हृदय रोगियों, बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील लोगों के लिए अचानक तेज आवाज परेशानी का कारण बन सकती है।
नियमों में कार्रवाई का प्रावधान, फिर भी बेखौफ इस्तेमाल
मोटर वाहन अधिनियम की संबंधित धाराओं और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत निर्धारित सीमा से अधिक आवाज करने वाले तथा प्रतिबंधित हॉर्न के इस्तेमाल पर कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बावजूद शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक भारी वाहनों में प्रेशर हॉर्न के इस्तेमाल की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
सरकारी वाहनों को लेकर भी उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब निजी वाहनों पर यातायात नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी परिवहन और यातायात विभाग की है, तो सरकारी परिवहन की बसों अथवा अन्य सरकारी बड़े वाहनों में यदि ऐसे हॉर्न का इस्तेमाल हो रहा है तो इसकी जांच कौन करेगा? लोगों ने विभाग से सरकारी और निजी दोनों श्रेणी के वाहनों की समान रूप से जांच कराने की मांग की है।
जनता ने मांगी अभियान चलाकर कार्रवाई
जनपदवासियों का कहना है कि केवल कागजों में नियम बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। आरटीओ और यातायात विभाग को अभियान चलाकर बड़े वाहनों में लगे प्रेशर हॉर्न की जांच करनी चाहिए और नियमों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। लोगों का कहना है कि सड़कों पर तेज आवाज के इस ‘शोर’ पर रोक लगाना यातायात सुरक्षा और आमजन की सुविधा दोनों के लिए जरूरी है।



