जबलपुर में हैवानियत! अस्वस्थ युवक पर बरसाए डंडे, तमाशबीन बनी संस्कारधानी!
Brutality in Jabalpur! An unwell youth was beaten with sticks, while the cultural capital became a mere spectator!
जबलपुर के सुप्रसिद्ध और धार्मिक आस्था के केंद्र ग्वारीघाट में इंसानियत को झकझोर देने वाला एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। दरअसल, ग्वारीघाट स्थित ‘ओम मेंस वियर’ दुकान के ठीक बाजू में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक गाड़ी (रजिस्ट्रेशन नंबर MP20MT0190) में सवार होकर आए कुछ बेखौफ दबंगों ने सड़क पर घूम रहे एक असहाय और मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद बिना किसी कसूर के उन दबंगों ने लाठी-डंडों से उस बेबस इंसान पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। सरेबाजार दिनदहाड़े किसी कमजोर पर इस तरह लाठियां बरसाना और उसे लहूलुहान कर देना दबंगई की सारी सीमाओं को पार करता है।
इस दर्दनाक घटना का सबसे खौफनाक और शर्मनाक पहलू यह रहा कि जब वह निहत्था व्यक्ति चीखता-चिल्लाता रहा और मदद की गुहार लगाता रहा, तब वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की भीड़ सिर्फ मूकदर्शक बनी रही। भरी दोपहर में सड़क पर हो रही इस हैवानियत को देखकर भी किसी एक भी राहगीर या प्रत्यक्षदर्शी ने आगे बढ़कर उस अस्वस्थ इंसान को बचाने की हिम्मत या जहमत तक नहीं उठाई। लोग अपने मोबाइलों में तमाशा देखते रहे या अनदेखा कर आगे बढ़ते रहे, जिससे यह साबित होता है कि आज के दौर में मानवीय संवेदनाएं किस कदर दम तोड़ चुकी हैं।
संस्कारों और उच्च नैतिक परंपराओं की दुहाई देने वाली ‘संस्कारधानी’ के माथे पर यह वारदात एक गहरा कलंक बन गई है। जिस शहर को उसकी संवेदनशीलता, भाईचारे और करुणा के लिए जाना जाता है, वहीं एक बेबस और मानसिक रूप से अस्वस्थ इंसान पर अत्याचार होते देखना समाज की बदलती और सड़ती मानसिकता का नग्न प्रदर्शन है। सवाल यह उठता है कि क्या किसी कमजोर और अस्वस्थ व्यक्ति के प्रति दया दिखाने के बजाय उस पर हिंसा करना सही है? सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद अब पूरे शहर में लोगों की इस बेरुखी और गिरते सामाजिक संस्कारों को लेकर भारी आक्रोश और आत्मचिंतन का माहौल बना हुआ है।
जबलपुर से वाजिद खान की रिपोर्ट



