आजमगढ़:माटीकला महोत्सव में डीआईजी सुनील कुमार सिंह का अनूठा अंदाज, खुद इलेक्ट्रिक चाक पर बनाए दीये-कुल्हड़; शिल्पकारों का बढ़ाया उत्साह
डीआईजी सुनील कुमार सिंह की सहभागिता ने बढ़ाया कलाकारों का उत्साह, 28 से अधिक शिल्पकारों ने महोत्सव में सजाए स्टॉल

सात दिवसीय आजमगढ़ माटीकला महोत्सव-2026 का शनिवार को भव्य समापन हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि डीआईजी आजमगढ़ परिक्षेत्र सुनील कुमार सिंह ने न केवल प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया, बल्कि माटीकला शिल्पकारों के हुनर और उनके उत्पादों की सराहना कर उनका मनोबल भी बढ़ाया।डीआईजी सुनील कुमार सिंह ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण कर कारीगरों से संवाद किया। खास बात यह रही कि उन्होंने स्वयं इलेक्ट्रिक चाक पर मिट्टी से दीये और कुल्हड़ बनाकर पारंपरिक कला के प्रति अपनी रुचि और जुड़ाव प्रदर्शित किया। उन्होंने दीया पेंटिंग प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया और बच्चों को भारतीय कला एवं संस्कृति से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।डीआईजी की इस सक्रिय सहभागिता और प्रोत्साहन से स्थानीय शिल्पकारों एवं कलाकारों में खासा उत्साह देखने को मिला। उन्होंने अपने व्यवहार और सहभागिता से यह संदेश दिया कि पारंपरिक कला एवं स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। महोत्सव के दौरान 28 से अधिक शिल्पकारों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं बिक्री की।
आजमगढ़, 07 नवम्बर:जनपद आजमगढ़ में माटीकला एवं पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आयोजित सात दिवसीय माटीकला महोत्सव–2026 का आज भव्य एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में समापन हुआ। एक से सात नवम्बर तक आयोजित इस महोत्सव ने जनपद के माटीकला उद्यमियों, शिल्पकारों एवं स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा और उत्पादों के प्रदर्शन एवं विपणन का एक सशक्त मंच प्रदान किया।समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस उपमहानिरीक्षक, आजमगढ़ परिक्षेत्र सुनील कुमार सिंह उपस्थित रहे। इस अवसर पर जेल अधीक्षक सत्य प्रकाश सिंह आजमगढ़ तथा मुख्य कोषाधिकारी अनुराग श्रीवास्तव एवं उपायुक्त उद्योग/महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र आशुतोष श्रीवास्तव सहित अन्य गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे।
महोत्सव के अंतर्गत आयोजित दीया पेंटिंग प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें 30 से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। मुख्य अतिथि एवं उपस्थित अधिकारियों द्वारा सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता एवं उत्साह की सराहना करते हुए उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दीं तथा भारतीय परंपरा, कला एवं संस्कृति से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।मुख्य अतिथि ने महोत्सव में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर माटीकला उद्यमियों द्वारा निर्मित उत्पादों का अवलोकन किया तथा उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने माटीकला शिल्पकारों से संवाद कर उनके कार्यों एवं उत्पादों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। इसके साथ ही उन्होंने महोत्सव के लाइव कारखाना क्षेत्र में पहुंचकर स्वयं मिट्टी से कुल्हड़ एवं इलेक्ट्रिक चाक पर दीये बनाकर माटीकला की पारंपरिक एवं आधुनिक निर्माण प्रक्रिया का अनुभव प्राप्त किया।महोत्सव के समापन अवसर पर माटीकला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पगमिल मशीन का निःशुल्क वितरण भी किया गया। इससे माटीकला उत्पादों के निर्माण में मिट्टी तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक सुगम एवं प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि सात दिनों तक चले इस महोत्सव में जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। महोत्सव में विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक, पुलिस उपमहानिरीक्षक सुनील कुमार सिंह, जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार (आईएएस), मुख्य विकास अधिकारी कमलकिशोर देशभूषण कंडारकर सहित जनपद के विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की तथा माटीकला उद्यमियों का उत्साहवर्धन किया।इस सात दिवसीय आयोजन में 28 से अधिक माटीकला उद्यमियों एवं शिल्पकारों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं विक्रय का अवसर प्राप्त हुआ। महोत्सव में पारंपरिक मिट्टी के दीये, कुल्हड़, सजावटी पात्र, आकर्षक लालटेन, दीपावली के विभिन्न सजावटी उत्पादों सहित अनेक प्रकार की कलाकृतियां प्रदर्शित एवं विक्रय की गईं। रंगोली, दीपोत्सव, सांस्कृतिक संध्याओं एवं लाइव कारखाना जैसी गतिविधियों ने महोत्सव को विशेष आकर्षण प्रदान किया। लाइव कारखाना में आगंतुकों को स्वयं मिट्टी से दीये बनाने का अवसर मिला, जिससे आमजन को पारंपरिक माटीकला की निर्माण प्रक्रिया से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ने का अनुभव प्राप्त हुआ।महोत्सव के सातों दिन बड़ी संख्या में आगंतुकों की सहभागिता रही। स्थानीय नागरिकों, परिवारों, युवाओं एवं बच्चों ने महोत्सव में पहुंचकर मिट्टी से निर्मित स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी की और पारंपरिक कला के प्रति अपनी रुचि प्रदर्शित की। इससे माटीकला उद्यमियों को प्रत्यक्ष बाजार उपलब्ध होने के साथ-साथ उनके उत्पादों के व्यापक प्रचार-प्रसार का अवसर भी मिला।माटीकला महोत्सव–2026 का यह आयोजन केवल एक प्रदर्शनी अथवा बिक्री मेले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पारंपरिक शिल्प, स्थानीय उद्यमिता, स्वरोजगार एवं सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। महोत्सव के माध्यम से स्थानीय कारीगरों को सम्मान, बाजार एवं प्रोत्साहन मिला तथा आमजन में स्वदेशी मिट्टी के उत्पादों को अपनाने और पारंपरिक माटीकला को संरक्षित करने का सकारात्मक संदेश प्रसारित हुआ।सात दिवसीय माटीकला महोत्सव का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि जनपद की समृद्ध माटीकला परंपरा को और अधिक प्रोत्साहित करते हुए स्थानीय शिल्पकारों एवं उद्यमियों को नए अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।



