एक फूल तीन मली, असमंजस मे पड़ गयी,महाराष्ट्र मे चुनाव की थाली
एक फूल तीन मली, असमंजस मे पड़ गयी,महाराष्ट्र मे चुनाव की थाली

रिपोर्टर रोशन लाल
महाराष्ट्र मे जैसे जैसे चुनाव की डेट करीब आती जारही है वैसे वैसे प्रत्यासियों और उनके समर्थकों के दिलों की धड़कन तेज होती जारही है।
दिलचस्प बात तो यह है कि कहीं कहीं एक ही सीट पर तीन तीन प्रत्यासी हो गये है जिससे सभी समर्थक हार जीत को लेकर असमंजस मे पड़े हैँ। कहा जारहा है कि खशबू तो तीनो मालियों को मिलेगी लेकिन फूल किस माली को मिलेगा यह तो समय ही बताएगा।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प हैं। दो गठबंधनों में तीन-तीन दल हैं और इनमें से दो ऐसे हैं, जिनमें असली और नकली की जंग है। एक शिवसेना MVA में है तो दूसरी महायुति का हिस्सा है। ऐसी ही स्थिति एनसीपी की भी है। इस बीच अजित पवार की एनसीपी के नेता नवाब मलिक के बयान ने हलचल बढ़ा दी है। उनका कहना है कि राजनीति में कोई भी बेस्ट फ्रेंड या दुश्मन नहीं होता है। चुनाव के बाद दोस्तों और दुश्मनों के बीच हालात बदल भी जाते हैं। नवाब मलिक के इस बयान से अजित पवार की एनसीपी के रुख को लेकर कयास लगने लगे हैं।नवाब मलिक ने कहा, ‘महाराष्ट्र में जिस तरह चुनाव हो रहे हैं, उससे लगता है कि बेहद करीबी मुकाबला होगा। कोई भी यह अनुमान नहीं लगा सकता कि चुनाव के बाद क्या होगा। 2019 में किसी ने भी नहीं सोचा था कि इस तरह सरकार बनेगी। राजनीति में कोई भी किसी का बेस्ट फ्रेंड या दुश्मन नहीं होता। दोस्तों और दुश्मनों के बीच चुनाव के बाद स्थितियां बदलती रहती हैं। लेकिन यह बात सही है कि अजित पवार किंगमेकर बनकर उभरेंगे। मैं तो चुनाव में अपने नाम, काम और विचार के नाम पर वोट मांगूंगा। मैं तो अजित पवार के साथ हूं।’मनखुर्द शिवाजीनगर सीट से उतरे नवाब मलिक का कहना है कि यह सत्य है कि चुनाव के बाद अजित पवार किंगमेकर बनकर रहेंगे। उन्होंने मौजूदा स्थिति को लेकर कहा कि यह तो एक राजनीतिक सामंजस्य है। किसी की राय को मानना अलग बात है। अजित पवार भी यह साफ कर चुके हैं कि यह एक राजनीतिक तालमेल है। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद अजित पवार किंगमेकर बनकर उभरेंगे और वह चंद्रबाबू नायडू के रोल में होंगे।महाराष्ट्र में उनके बिना सरकार नहीं बनेगी। नवाब मलिक के बयान से हलचल तेज हो सकती है क्योंकि उन्होंने स्थायी दुश्मन या दोस्त न रहने की बात कही है। इसके अलावा किंगमेकर की बात कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यह इस बात का संकेत है कि चुनाव बाद की स्थितियों में अजित पवार कोई भी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र होंगे।



