हनुमान जी करते हैं सभी के प्राणों की रक्षा

पंडित विनय मिश्र
बरहज, देवरिया।
सरयू सत्संग समिति द्वारा आयोजित श्री राम कथा के तीसरे दिवस सायंकालीन सभा में आश्रम बरहज से पधारे हुए, कथा व्यास पंडित विनय मिश्रा ने हनुमत चरित्र पर कथा बोलते हुए कहा कि हनुमान जी ने पांच लोगों के प्राणों की रक्षा की आगे चर्चा करते हुए कहां की जिस समय प्रभु श्री राम जानकी के बिरहा में जगह-जगह ढूंढ रहे थे वैसे में किष्किंधा पर्वत के नीचे हनुमान जी से भगवान की मुलाकात हुई प्रभु श्री राम ने सीता हरण की पूरी बात बताई उसे समय अतुलितबल के धाम, हनुमान जी ने जानकी जी को ढूंढ निकालने का वचन दिया, आगे उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम की नाम मुद्रिका को लेकर जानकी जी की तलाश में निकल गए उधर अशोक वृक्ष के नीचे अपने प्रभु के वियोग में प्राण त्यागने वाली थी ऐसे में हनुमान ने पहुंचकर जानकी के जीवन की रक्षा की आगे लक्ष्मण को मेघनाथ द्वारा युद्ध के दौरान मूर्छित कर दिया गया था प्रभु श्री राम सहित संपूर्ण बानरी से ना उदास, हो गई थी ऐसे अवसर पर सुसेन वैद्य के कहने पर, सूर्योदय से पहले औषधि लाकर लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा की। प्रभु श्री राम के 14 बरस के वनवास काल जीतने के अंतिम दिन अंतिम समय में भरथ प्रभु श्री राम वियोग में व्याकुल हो रहे थे और अग्नि की चिता सजाकर अब अग्नि में प्रवेश करने ही वाले थे इसी बीच हनुमान जी ने अयोध्या पहुंचकर प्रभु श्री राम के अयोध्या आने की सूचना भरत को दी और भरत जी के भी प्राण बचाए इसीलिए गोस्वामी जी ने कहा सब सुख रहे तुम्हारी वरना, तुम रक्षक काहू को डरना। जो मनुष्य हनुमान जी की शरण में रहता है हनुमान जी उसकी सब प्रकार से रक्षा करते हैं कथा के दौरान कथा व्यास विद्याभूषण जी महाराज बक्सर, हरि ओम शरण जी महाराज, अंगद प्रसाद द्विवेदी करायल शुक्ला, अरविंद जी महाराज बरहज, पंडित विनय मिश्रा आश्रम बरहज ,कथा के आयोजक सुधाकर मणि त्रिपाठी, मंच संचालक गणेश मिश्रा ,रमेश तिवारी अनजान, रामेश्वर यादव ,सहित काफी संख्या में श्रद्धालु भक्तजन उपस्थित रहे।


