ना प्रसाद ना चढ़ावा भक्ति भाव से भगवान को ध्रुव ने कर लिया प्रसन्न – आचार्य घनश्यामानंद।   श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिन। 

 

विनय मिश्र, जिला संवाददाता।

सलेमपुर, देवरिया। मनुष्य अगर बिना दिखावा व आडम्बर के सच्चे मन से परमात्मा को याद करे तो उस पर भगवान तुरन्त प्रसन्न हो उसका कल्याण करते हैं, उक्त बातें नगर के ईचौना पश्चिमी वार्ड में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को संगीतमय कथा का रसपान कराते हुए आचार्य घनश्यामानंद ओझा ने कहा उन्होंने कहा कि बिना प्रसाद व चढ़ावा के ही भक्त घ्रुव ने पांच वर्ष के ही उम्र में अपने सौतेली मां सुरुचि से अपमानित होने की बात अपने मां सुनीधि को बताई तो उसने कहा कि जो बात तुम्हारे सौतेली मां ने कहा है मेरा बेटा राजा का बेटा है तुम जाकर भगवान की भक्ति कर इसके बाद जब तुम हमारे गर्भ से पैदा होकर आना तब राजा की गोंद में बैठना वह अच्छी बात है तुम भगवान की भक्ति करो वही तुम्हारा कल्याण करेंगे। इसके बाद बालक ध्रुव ने नारायण की सेवा में अपने को समर्पित कर दिया।उसके भावपूर्ण भक्ति को देखकर भगवान ने उसे वर मांगने को कहा तो उसने अपने कहा कि मेरी सौतेली मां सुरुचि ने मुझे पिता की गोंद से अपमानित कर उतार दिया है आप मुझे अपने गोंद में उठा लीजिए। उसके निश्छल भक्ति भाव को देख भगवान ने उसे गोंद में उठा लिया और वरदान दिया कि मृत्योपरांत तुमको आकाश में एक स्थायी स्थान दिया जाएगा जहां से पूरे सृष्टि पर चमकते रहना। श्रीमद्भागवत कथा हमें जीवन जीने व इससे मुक्ति की कथा है जो मनुष्य पवित्र मन से इसका श्रवण करता है वह इस सांसारिक जीवन व माया मोह से मुक्त हो कर भगवान की शरण मे चला जाता है। कथा के दौरान राजेश्वर तिवारी मुन्ना, सरस्वती देवी,सेंट जेवियर्स के प्रधानाचार्य वीके शुक्ल,डॉ धर्मेन्द्र पांडेय, अशोक पांडेय, रामरतन गुप्त, डॉ उमेश पाण्डेय, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव पिंकू, सत्यम पांडेय, सुधाकर मिश्र, संजय तिवारी, विजय मिश्र आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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