कुशीनगर:कबियो ने अपनी अपनी रचनाओं को पढा

रिपोर्ट।मशरुर रिजवी

कसया कुशीनगर : कसया तहसील क्षेत्र के गांव भठही राजा में साहित्यकार चन्द्रेश्वर शर्मा परवाना के द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन साहित्यकारों ने अपनी अपनी रचनाओं को पढ़कर सबको मनमोहक किया । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर व्लाक प्रमुख प्रतिनिधि सुधीर राव एवं विशेष अतिथि के तौर पर अधिवक्ता आनन्द राय व पूर्व ग्राम प्रधान सुभाष राव के द्वारा सरस्वती जी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर किया गया । कवि सम्मेलन में देवरिया गोरखपुर कुशीनगर बनारस के अलग-अलग शहरों से सौ से ज्यादा साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। मुख्य अतिथि सुधीर राव ने कहा कि हम सबको मिलकर इस साहित्य की मुहिम को हर घर तक पहुचाना चाहिए। और साहित्य कला को आगे बढ़ाने के लिए हम सभी लोगों को जागरूक होना होगा । इस दौरान काव्य गोष्ठि का शुभारंभ अश्वनी दुबे ने सरस्वती वंदना गायन से किया। ए हमीद आरजू ने धरती, औरत और फूल कविता पेश की। कृष्णा श्रीवास्तव ने मयखाना तथा अरशी वस्तवी ने वीरां दा मान कविता पेश की। जहां मिट्टी के महत्व को दर्शाती कविता मिट्टी करे पुकार पेश की वहीं मधुसूदन पांडेय ने गजल ‘यूं हुआ उसकी निगाहों का असर’ पेश की। छात्रा सिमरन ने ‘सपनों की पतंग’ तथा परमानंद मिश्रा परम ने आधुनिक समय में लड़कियों के बुलंद हौसलों तथा आगे बढ़ने की ललक से परिचय करवाया। आकाश महेशपूरी ने कविता खुदा का रोल’ तथा अकांक्षा ने कृष्णा भजन सुनाया बिनोद पांडेय ने कविता ‘आह’ पेश की। ब्रजेंद्र ठाकुर के हास्यरस से भरी कविताएं सुनाईं। मोहन पांडेय ने ‘बच्चों के झूले’ तथा सचिदानंद पांडेय ने ‘अगर मैं पंछी होता’ कविता पेश की। रामनरेश शर्मा ने कुटिल राजनीति पर वार करतीं कविताएं सुनाई। अश्वनी कुमार दूबे ने ‘दुनिया में मुहब्बत की बस इतनी सी कहानी है’ पेश की। धीरज राव ने ‘मेरे भारत की मिट्टी की खुशबू चंदन सी महका करती है.पेश की।जिन्दगी बहुत कुछ सिखाती है.कविता सुनाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवा निवृत्त शिक्षक रामदेव राय व संचालन धीरज राव ने किया आयोजक साहित्यकार चन्द्रेश्वर शर्मा परवाना ने आये सभी आगुंतकों को आभार प्रकट करते हुए कहा कि हम सभी लोगों का दावित्य है कि साहित्य को समृद्ध किया जाना चाहिए इस अवसर पर पूर्व ग्राम प्रधान अमित राव डिम्पल पांडेय संजय मिश्रा सुमित राय हरेंद्र यादव आदित्य पांडेय रमेश जायसवाल अजय जयसवाल पेशकार गोंड आदि मौजूद रहे।

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