Azamgarh news :पुलिस मुठभेड़ में हिस्ट्रीशीटर, गोवध, चोरी एवं गैंगस्टर एक्ट का अपराधी घायल / गिरफ्तार 

पुलिस मुठभेड़ में हिस्ट्रीशीटर, गोवध, चोरी एवं गैंगस्टर एक्ट का अपराधी घायल / गिरफ्तार 

आजमगढ़ ब्यूरो चीफ राकेश श्रीवास्तव

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ डॉ0 अनिल कुमार के निर्देशन में तथा अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण एवं क्षेत्राधिकारी बूढ़नपुर अजय प्रताप सिंह के कुशल पर्यवेक्षण में दिनांक- 22/23.05.2026 की रात्रि लगभग 02:20 बजे थाना कप्तानगंज पुलिस द्वारा क्षेत्र में अपराध नियंत्रण, संदिग्ध व्यक्ति/वाहन की चेकिंग एवं रात्रि गश्त की जा रही थी।

इसी दौरान सूचना प्राप्त हुई कि थाना क्षेत्र में दिनांक 12.05.2026 को ग्राम कुशमहरा CHC छितुवा के पीछे हुई गोकशी की घटना, जिसके सम्बन्ध में थाना कप्तानगंज पर मु0अ0सं0 143/2026 धारा 3/5/8 गोवध निवारण अधिनियम बनाम अज्ञात पंजीकृत किया गया था, से संबंधित बाइक सवार 02 अपराधी धरौली मोड़ कूड़ा घर कुशमहरा की तरफ आ रहे हैं तथा पुनः किसी गौकशी की घटना को अंजाम देने की फिराक में हैं। इस सूचना पर थानाध्यक्ष कप्तानगंज मय पुलिस बल द्वारा तत्काल घेराबंदी की गई।

स्वयं को पुलिस बल से घिरता देख बदमाशों द्वारा जान से मारने की नियत से पुलिस पार्टी पर फायर किया गया। पुलिस बल द्वारा आत्मसमर्पण करने की पर्याप्त चेतावनी दी गई, किन्तु बदमाश द्वारा पुनः फायरिंग का प्रयास किया गया। जवाबी कार्यवाही करते हुए पुलिस बल द्वारा आत्मरक्षार्थ नियंत्रित फायरिंग की गई, जिसमें एक बदमाश के दाहिने पैर में गोली लगी, जबकि एक अन्य बदमाश मौके से फरार हो गया।

घायल/गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान-

1. आरिफ उर्फ फुसी पुत्र यूनुस निवासी सारैन थाना अहरौला जनपद आजमगढ़ उम्र करीब 32 वर्ष (दाहिने पैर में गोली लगने से घायल)

फरार अभियुक्त

1. आजाद पुत्र फिरोज निवासी मेहियापार थाना अहरौला जनपद आजमगढ़ उम्र करीब 35 वर्ष (फरार अभियुक्त)

घायल अभियुक्त को उपचार हेतु सदर अस्पताल आजमगढ़ भेजा गया है।

घायल बदमाश आरिफ उर्फ फुसी पुत्र यूनुस थाना अहरौला का हिस्ट्रीशीटर एवं गैंगस्टर एक्ट का अपराधी है।

घटनास्थल को सुरक्षित कर फील्ड यूनिट द्वारा निरीक्षण कर साक्ष्य संकलन की कार्यवाही की गई है।

पूछताछ के दौरान अभियुक्त ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर सुनियोजित ढंग से प्रतिबन्धित पशुओं को पकड़कर रात्रि में सुनसान एवं निर्जन स्थानों पर ले जाकर उनका वध कर मांस की बिक्री/उपभोग करता था।

प्रतिबन्धित पशुओं को चिन्हित कर अवसर का लाभ उठाकर पकड़ लेते थे।

वध के बाद पशुओं के अवशेषों को नदी/नालों अथवा सिवान में फेंक देते थे अथवा जमीन में गाड़ देते थे, जिससे अपराध का खुलासा न हो सके।

पुलिस की निगरानी से बचने हेतु अभियुक्त बार-बार स्थान परिवर्तन करते थे तथा अपनी आपराधिक गतिविधियों को गोपनीय रखने का प्रयास करते थे।

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