Azamgarh News:1962 युद्ध के वीर सेनानायक जनरल आर. के. राय की पुण्यतिथि पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, क्षेत्रवासियों ने किया नमन*
*1962 युद्ध के वीर सेनानायक जनरल आर. के. राय की पुण्यतिथि पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, क्षेत्रवासियों ने किया नमन*
बरदह (आजमगढ़), 2 जुलाई। आजमगढ़ की धरती के गौरव, भारतीय सेना के वीर सेनानायक जनरल आर. के. राय की पुण्यतिथि पर गुरुवार को उनके पैतृक क्षेत्र बरदह में श्रद्धा और सम्मान के साथ उन्हें याद किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शिक्षकों, छात्र-छात्राओं, अभिभावकों तथा क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके राष्ट्रसेवा एवं शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए अतुलनीय योगदान को स्मरण किया।
वक्ताओं ने कहा कि जनरल आर. के. राय ने अपने सैन्य जीवन में देश की रक्षा के लिए अदम्य साहस, अनुशासन और नेतृत्व का परिचय दिया। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान उन्होंने विषम परिस्थितियों में अग्रिम मोर्चे पर अपनी सैन्य टुकड़ी का कुशल नेतृत्व किया। इसके अतिरिक्त नागालैंड में उग्रवाद विरोधी अभियानों के दौरान भी उन्होंने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति उनकी निष्ठा और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें भारतीय सेना द्वारा विभिन्न सैन्य सम्मान एवं पदकों से सम्मानित किया गया।
सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका जीवन समाज और शिक्षा के लिए समर्पित रहा। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2000 में अपने पैतृक गांव बरदह में कृष्ण पब्लिक स्कूल की स्थापना की। आज यह विद्यालय सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान के रूप में हजारों विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर रहा है। विद्यालय से अनेक छात्र-छात्राएं विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर जनरल राय के सपनों को साकार कर रहे हैं।श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि जनरल आर. के. राय केवल एक वीर सैनिक ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक, शिक्षाविद और ग्रामीण विकास के प्रेरणास्रोत भी थे। उन्होंने अपने कर्म, त्याग और दूरदर्शिता से यह सिद्ध किया कि सच्ची देशभक्ति केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज को शिक्षित और सशक्त बनाना भी राष्ट्रसेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है।कार्यक्रम के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि जनरल आर. के. राय के आदर्शों, राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और सेवा भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का निरंतर प्रयास किया जाएगा।
क्षेत्रवासियों का कहना था कि 1962 के बर्फीले मोर्चों से लेकर नागालैंड के दुर्गम जंगलों तक देश की रक्षा करने वाले तथा अपने गांव में शिक्षा की अलख जगाने वाले जनरल आर. के. राय का योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।



